हे देशवासियों! मैं अयोध्या बोल रहा हूं, मेरी आवाज सुनो

अखिलेश अखिल

यह बात और है कि अयोध्या मसले की सुनवाई फिर से देश के सुप्रीम कोर्ट में शुरू हो गया है। अदालत के फैसले का देश ही नहीं दुनिया को भी इन्तजार है। सबकी चाहत है कि अयोध्या में भगवान् श्रीराम का भव्य मंदिर बने आखिर उनका जन्म स्थल जो है। पौराणिक इतिहास में तो ऐसा ही कुछ दर्ज है। भगवान श्रीराम हिन्दुओं के आराध्य हैं। भला अपने आराध्य के मंदिर बनने पर किसे ऐतराज ? लेकिन आजतक वहाँ मंदिर नहीं बन सका। मंदिर के नाम पर राजनीति तो खूब हुयी ,जानें भी गयी ,केस मुक़दमे भी हुए और कइयों की बदनामी भी। लेकिन मंदिर नहीं बना। अब तो मामला अदालत में पैबस्त है। अदालत का फैसला सिरोधार्य। सबको इसी का इन्तजार है।

लेकिन उधर अयोध्या का पग पखारती सरयू नदी मौन है। कहने के लिए कभी कभी सरयू कुलबुलाती है ,अपनी लहरें उठाती है लेकिन कुछ सोचकर फिर शांत हो जाती है। अयोध्या के प्रतिक चिन्हों में सरयू भी एक है। भगवान् राम का इस सरयू से बड़ा गहरा नाता रहा है। अयोध्या के बिना सरयू की क्या बिसात ! और सरयू के बिना अयोध्या का क्या मोल ! लेकिन सरयू अभी मौन है। इतिहास को समेटे सरयू वक्त का इन्तजार कर रही है। समय आने पर वह भी बोलेगी। बोलेगा अयोध्या का हनुमानगढ़ी मंदिर भी। चिलायेंगे वहाँ के सैकड़ों मंदिर भी। वहाँ के भक्त जन भी। वहाँ जाने वाले तीर्थयात्री भी और वहाँ रहने वाले सकल समाज भी। लेकिन अभी नहीं। उन्हें भी वक्त का इन्तजार है।

लेकिन इसी बीच राजनीति से आहात होकर अयोध्या के संत समाज अब तिलमिलाना शुरू कर दिए हैं। आखिर अयोध्या की असली आवाज तो वही है। धर्म के रक्षक जो हैं। अयोध्या संत समाज का ख़ास स्थल है। यह बात और है कि अखाड़ों में बंटे संत एक दूसरे अखाड़े के संतों से बराबरी का रिश्ता नहीं रखते ,कभी कभी तो अखाड़ों की लड़ाई चरम सीमा पार जाती है। वे आपस में लड़ते भिड़ते भी हैं लेकिन भगवान राम के पास जाकर नतमस्तक हो जाते हैं। यही नतमस्तक उनकी एकता एकता का प्रतीक है। धर्म के जितने भी दर्शन और वाद धर्मशात्र में वर्णित हैं सबके अध्येता अयोध्या में बिराजमान हैं। सबके अपने महल हैं ,रहने खाने की उत्तम व्यवस्था है ,ऐशोआराम और राजनितिक पहुँच भी। लेकिन भगवान श्रीराम आज भी विस्थापित हैं।

ना उनका घर है कर ना ही कोई उनके ऐशो आराम की व्यवस्था। भगवान श्रीराम अपने भक्त ,अपने लोग और सरकार -राजनीति के बीच फस गए हैं। कलयुग में वे चाहकर भी कुछ कर नहीं पा रहे हैं। लेकिन अब अयोध्या भगवान् की ऐसी हालत देखकर अपना आपा खोता दिख रहा है। संत समाज अब गरज रहे हैं। संत समाज को लग रहा है कि अयोध्या और राम मंदिर के नाम पर जिस राजनीतिक दाल बीजेपी ने शुन्य से शिखर की यात्रा पूरी कर ली ,राम मंदिर नहीं बना सका। बीजेपी की हालत बदल गयी लेकिन भगवान् राम की हालत नहीं बदली।

अयोध्या का नामी निर्मोही अखाड़ा अब अपने रंग में है। निर्मोही अखाड़ा ने बीजेपी पर बड़ा हमला किया है। आखड़ा ने कहा है कि राम मंदिर को लेकर जिस तरह से बीजेपी देश और प्रदेश की सत्ता में आई उसे देखकर ये माना जाने लगा था की बीजेपी राममंदिर बनवाएगी। मगर ऐसा कुछ हुआ नहीं। निर्मोही अखाड़े के लोग बीजेपी पर राममंदिर के नाम पर धोखा देने का आरोप लगा रहे है। अयोध्या से उठी यह आवाज सिर्फ निर्मोही अखाड़े की ही नहीं है। अब इस विरोध की कड़ी में एक और नाम जुड़ गया है वो है अयोध्या के रामलला पुजारी का। जिन्होंने साफ़तौर पर कह दिया है कि बीजेपी ने सिर्फ वोट लिया और कुछ भी नहीं किया है। संतों का कहना है कि बीजेपी सिर्फ राममंदिर के नाम पर वोट लेना जानती है उसके लिए करती कुछ नहीं है।

इन्ही संतों में से एक आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा, “बीजेपी राम मंदिर के नाम पर केवल वोट लेती है। पार्टी मंदिर निर्माण से भाग रही है। बीजेपी राम मंदिर के नाम पर सत्ता में आई अब उसे राम मंदिर का निर्माण शुरू करवाना चाहिए। वही एक और संत पीठाधीश्वर स्वामी परमहंस दास का कहना है कि बीजेपी के पास अब कोई बहाना नहीं बचा है क्योकिं प्रदेश और केंद्र दोनों ही जगह पर उसी की सरकार है। बीजेपी को चाहिए वो राम मंदिर निर्माण शुरू हो, नहीं तो संत समाज बीजेपी का विकल्प तलाशेगा। जाहिर है अब अयोध्या का धैर्य खो गया है। राजनीति से अयोध्या ग्लानि से भर गया है और दुखी है।

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