हे मेडिकल दलाल ! तुम रहम करो, न्यायिक विद्रोह मत कराओ

दिल्ली ब्यूरो: इतिहास बना देश के सुप्रीम कोर्ट का न्यायिक विद्रोह भले ही अभी शांत दिखता हो लेकिन अभी भी सब कुछ ठीक ठाक नहीं है। चाय पर चर्चा करके सुप्रीम जजों ने भले ही एकता का प्रदर्शन किया है लेकिन जिस तरह से पांच सदस्यीय संविधान पीठ कल गठित की गयी और उस पीठ में मीडिया के सामने आने वाले चारो जजों में से किसी को शामिल नहीं किया गया ,इससे साफ़ हो जाता है कि सुपरम विवाद अभी ख़त्म नहीं हुआ है। उम्मीद की जानी चाहिए कि आगे सब ठीक हो जाएगा।

लेकिन इधर मेडिकल घोटाले के मामले में ओडिशा हाईकोर्ट के एक पूर्व जस्ट‍िस की एक दलाल से बातचीत का सीबीआई द्वारा किया गया कथि‍त फोन टैप सार्वजनिक होने के बाद अब इस मामले में ना सिर्फ जांच की मांग बढ़ गई है वल्कि सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को लेकर राजनीति शुरू हो गयी है। आपको बता दें कि मेडिकल ए‍डमिशन घोटाले का यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में है और यह मसला भी सीजेआई दीपक मिश्रा के ख‍िलाफ चार वरिष्ठ जजों के बागी तेवर दिखाने की एक वजह है। जस्ट‍िस जे चेलमेश्वर ने इस कथ‍ित घोटाले की सुनवाई के लिए एक संवैधानिक बेंच बनाने का आदेश दिया था, लेकिन नवंबर माह में सीजेआई मिश्रा ने इस आदेश को पलट दिया था।

इस मामले में श‍िकायत करने वाले लोग अब उस बातचीत का ट्रांसक्रिप्ट सर्कुलेट कर रहे हैं, जिसमें यह पता चलता है कि ओडिशा हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्ट‍िस कुद्दूसी ने एडमिशन घोटाले के मामले में जजों को प्रभावित करने की कोश‍िश की थी। इस टेप में जज कथित रूप से मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट बेचने वाले दलाल से बात कर रहे हैं। इस बातचीत से ऐसा लगता है कि भ्रष्टाचारियों को मौजूदा केंद्र सरकार से डर है, क्योंकि बातचीत में दलाल यह साफ कहता है कि ‘चाय वाले’ की सरकार में सब पर नजर रखी जा रही है।

गौरतलब है कि पिछले साल सितंबर माह में सीबीआई ने ओडिशा हाईकोई के पूर्व जज आइएम कुद्दूसी को मेडिकल घोटाला के आरोप में गिरफ्तार किया था कि वे सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट के कुछ शीर्ष जजों को घूस देकर प्रभावित करने की साजिश रच रहे थे। इस मामले में याचिका दाख‍िल करने वाले वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने इस टेप की एक स्वतंत्र और पारदर्शी तरीके से जांच की मांग की है।

इस ट्रांसक्रिप्ट के मुताबिक कुद्दूसी ने लखनऊ के प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट और सहारनपुर के ग्लोकल मेडिकल कॉलेज के पक्ष में आदेश दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के जजों को सेट करने का प्रयास किया। बता दें कि इन दोनों कॉलेजों पर सरकार के नियम के ख‍िलाफ जाकर एडमिशन देने का आरोप था। सितंबर में अपनी गिरफ्तारी से पहले पूर्व जस्ट‍िस कुद्दूसी को मेडिकल कॉलेजों के दलाल विश्वनाथ अग्रवाल और प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट के बीपी यादव से डीलिंग करते हुए पकड़ा गया था। फोन से इनकी जो बातचीत टेप हुई उसमें वे कोड वर्ड में बातचीत कर रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट या इलाहाबाद हाईकोर्ट को मंदिर बता रहे हैं। इस बातचीत में अग्रवाल पूछता है, ‘यह कौन से मंदिर में है। इलाहाबाद या दिल्ली के मंदिर में?’ कुद्दूसी इसके जवाब में कहते हैं, ‘नहीं, नहीं अभी तो यह किसी मंदिर में नहीं है, लेकिन यह जाएगा। ‘

इस बातचीत में दलाल अग्रवाल चिंता जताता है कि ‘चायवाले’ की सरकार भ्रष्टाचार पर सख्ती से नजर रखे हुए है। अग्रवाल कहता है, ‘लगेज पहले ही देना होगा और वह मीटिंग के लिए तैयार नहीं हैं क्योंकि यह चायवाले की सरकार है। यह सब पर नजर रखे हुए है, यही समस्या है। ‘ दोनों घूस के बारे में खुलकर बात करते हैं। रिटायर्ड जस्ट‍िस कुद्दूसी पूछते हैं, ‘कितना एडवांस मिलेगा। ‘ इसका जवाब मिलता है, ‘उन्होंने तो उस समय कहा था कि रीव्यू पेटिशन के लिए 100 लोगों को देना होगा. यदि रीव्यू की इजाजत मिलती है, तो आपको बता दिया जाएगा. सोमवार को हम तय करेंगे। वे हमें 2 से 2.5 तक सामान देंगे, कोई समस्या नहीं। ‘

आपको बता दें कि बीते साल सीबीआई ने इस घोटाले में जिन लोगों को गिरफ्तार किया था उनमें रिटायर्ड जस्टिस इशरत मसरूर कुद्दूसी के अलावा बिचौलिया विश्वनाथ अग्रवाल, प्राइवेट मेडिकल कॉलेज के मालिक बी. पी. यादव और पलाश यादव के अलावा हवाला ऑपरेटर राम देव सारस्वत शामिल हैं। आगे अब क्या होता है इसे देखना होगा लेकिन यह तो साफ़ है कि हमारे देश में मेडिकल घोटाला सालों से जारी है और इसमें लोकतंत्र के चारो स्तम्भ के लोग अपनी भागीदारी निभाते रहे हैं। दलाल संस्कृत में जीने वाले हम सब भी किसी दलाल से कम नहीं रहे।

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