हे योगी जी ! आपका राज्य साम्प्रदायिक हिंसा में पहले पायदान पर है, कुछ कीजिए

अखिलेश अखिल

लखनऊ ट्रिब्यून ब्यूरो: वैसे तो हर प्रदेश का अपना मिजाज है और सांस्कृतिक, राजनीतिक और सामाजिक इतिहास भी। ऐसे में यूपी का इतिहास अन्य राज्यों की अपेक्षा ज्यादा ही सबल और धवल रहा है। सूबे का अपना अलग ही सांस्कृतिक और मानवीय चरित्र भी रहा है जिसे देख सुनकर दुनिया के लोग भी सन्न रहे हैं। साहित्य का केंद्र और गंगा यमुनी संस्कृति तहजीब का अखाड़ा यूपी ही रहा है। भगवान राम से लेकर बुद्ध ,कबीर से लेकर वाराणसी में पीला बढे ,साहित्यकारों ,वैज्ञानिको और संस्कृति कर्मियों की अद्भुत दुनिया देश को बेहद आकर्षित भी करती है। गोरखपुर का धाम बहुत कुछ बताता।

योग और धर्म का केंद्र यूपी दुनिया को रिझाती भी है और अपनी तरफ खींचती भी है। राजनीति का भी यह केंद्र रहा है। लेकिन अब यूपी बदल रहा है। अब यह साम्प्रदायिक हिंसा का केंद्र भी बनता जा रहा है। वैसे बीजेपी शाषित अधिकतर राज्यों में साम्प्रदायीक हिंसा में इजाफा देखा जा रहा है लेकिन जिस तरह से यूपी जैसे गंगा यमुनी संस्कृति वाले राज्य में साम्प्रदायिक हिंसा की सूचि लम्बी हो रही है ,अचरज में डालता है।

संसद में पेश गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में यह बताया गया है की यूपी में साम्प्रदायिक हिंसा लगातार बढ़ती जा रही है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि उत्तर प्रदेश में साल 2017 में सांप्रदायिक हिंसा की 195 वारदातें दर्ज की गईं, जबकि इसके पिछले साल यहां 101 ऐसी घटनाएं सामने आई थीं। वहीं राजस्थान में साल 2016 में 63 मामलों के मुकाबले साल 2017 में सांप्रदायिक हिंसा की 91 घटनाएं, बिहार में 2016 में दर्ज 65 के मुकाबले बीते साल 85 मामले और मध्य प्रदेश में 57 मामलों की तुलना में पिछले साल 60 केस सामने आए हैं।

वहीं सांप्रदायिक हिंसा की इस लिस्ट में उत्तर प्रदेश के बाद कांग्रेस शासित कर्नाटक का स्थान आता है, जहां साल 2017 में 100 मामले दर्ज किए गए, जबकि इससे पहले यहां 101 केस दर्ज हुए थे। ऐसे में एक सवाल यह भी उठता है कि माया से विरक्त और साधक रहे योगी आदित्यनाथ के राज में आखिर हिंसा कैसी ? साम्प्रदायिक तनाव कैसा ? उम्मीद की जा सकती है कि सीएम योगी अपने अनुरूप सूबे को आगे बढ़ाएंगे ताकि यूपी का समाज हिंसा की बजाय प्रेम का आलिंगन कर सके।

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