हे योगी जी !दंगाई तो समाज पर कलंक है ,इन्हे मत बचाइए

अखिलेश अखिल


किसी भी सभ्य समाज में दंगा को कैसे जायज ठहराया जा सकता है ? और दंगाई को तो कभी माफ़ नहीं किया जा सकता। दंगाई लोग भले ही आधुनिक राजनीति के अस्त्र हों लेकिन इनकी कोई कौन नहीं होती। ये अपराधी होते हैं और मानवता के विरोधी भी। ये हिन्दू -मुसलमान नहीं होते। जो संविधान और लोकतंत्र के लिए चुनौती बने उसे दण्डित करना ही उचित होता है। इसलिए हे योगी जी दंगाइयों को नेता मत बनाइये।

ये बातें इसलिए कही जा रही है कि अभी यह जानकारी मिल रही है कि यूपी की योगी की सरकार मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान कानून के शिकंजे में आए बीजेपी नेताओं को राहत देने की तैयारी में है। सरकार ने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगा केस में बीजेपी नेताओं के खिलाफ अदालत में लंबित 9 आपराधिक मामलों को वापस लेने की संभावना पर सूचना मांगी है। आपको बता दें कि इससे पहले स्वम मुख्यमंत्री योगी अपने खिलाफ मामलों को वापस ले लिया था।

बता दें कि दंगों के आरोप में मंत्री सुरेश राणा, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बाल्यान, सांसद भारतेंदु सिंह, विधायक उमेश मलिक और पार्टी नेता साध्वी प्राची के खिलाफ केस दर्ज हैं। खबर है कि जिलाधिकारी को पांच जनवरी को लिखे पत्र में उत्तर प्रदेश के न्याय विभाग में विशेष सचिव राज सिंह ने 13 बिंदुओं पर जवाब मांगा है। इनमें जनहित में मामलों को वापस लिया जाना भी शामिल है। पत्र में मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का विचार भी मांगा गया है।

हालांकि, पत्र में नेताओं के नाम का जिक्र नहीं है लेकिन उनके खिलाफ दर्ज मामलों की फाइल संख्या का जिक्र है। बता दें कि समाजवादी पार्टी की अखिलेश सरकार के दौरान पश्चिमी यूपी के मुजफ्फरनगर में भीषण दंगा हुआ था। मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों में अगस्त-सितंबर 2013 में हुए सांप्रदायिक दंगे में 60 लोग मारे गए थे और 40 हजार से अधिक लोग बेघर हुए थे। इस दंगे के बाद बीजेपी ने सपा सरकार पर गलत ढंग से कानून कार्रवाई के आरोप लगाए थे। बीजेपी के कई नेताओं पर दंगों से जुड़े केस चल रहे हैं। जिन्हें खत्म करने पर योगी सरकार विचार कर रही है।

गौरतलब है कि दिसंबर में सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ केस वापस लेने का आदेश जारी किया गया था। योगी के अलावा शिव प्रताप शुक्ल, विधायक शीतल पांडेय और 10 अन्य के खिलाफ धारा 188 के तहत लगे केस वापस लेने का आदेश जारी किया गया है।

जिस समाज में दंगे की राजनीती चलती है वह समाज कभी फलता फूलता नहीं। अपराध को महिमांडित नहीं किया जा सकता। अपराधी को दण्डित ही किया जा सकता है। ऐसे में जरुरत इस बात की है कि मामले की ठोस सुनवाई हो ताकि दंगाई को दंड मिले और बेकसूरों को न्याय।

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