​गोमती रिवरफ्रंट मामले में प्रवर्तन निदेशालय की कार्यवाही से हड़कम्प

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में गोमती रिवरफ्रंट मामलें में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों की कार्यवाही से हड़कम्प मच गया है। इस मामलें में निदेशालय ने आठ अभियंताओं के खिलाफ मुकदमा भी पंजीकृत किया है।

उत्तर प्रदेश में पिछली सरकार में गोमती रिवरफ्रंट की बैठकों और योजनाओं का दौर चला और जब प्रदेश में भाजपा की सरकार आयी तो रिवरफ्रंट मामलें में घोटाला होने की आशंका पर जांच के निर्देश दिये गये। राज्य सरकार के आग्रह पर सीबीआई लखनऊ की एंटी करप्शन ब्रांच ने 30 नवंबर 2017 को सिंचाई विभाग के आठ अभियंताओं सहित अन्य अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।

इससे पहले जून 2017 में सिंचाई विभाग की ओर से गोमतीनगर थाने में एफआइआर दर्ज कराई गई। सीबीआई के साथ ही प्रवर्तन निदेशालय के इस मामलें में सक्रिय हुआ और अब निदेशालय ने भी आठ अभियंताओं के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत करा दिया है।

गोमती रिवरफ्रंट के निर्माण के लिए 747.49 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ था, जिसके पहले मुख्य सचिव की बैठक में निर्माण कार्य के लिए 1990.24 करोड़ रुपये का प्रस्ताव हुआ था। वर्ष 2016 के जुलाई में 1513.51 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए और निर्माणकार्य में स्वीकृत राशि से 1437.83 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इसके बावजूद गोमती रिवरफ्रंट मामलें में सक्रिय अभियंताओं ने केवल साठ प्रतिशत कार्य ही पूरा करना प्रस्तुत किया था।

इनके विरूद्ध दर्ज हुआ मुकदमा

प्रवर्तन निदेशालय ने मामले में नामजद आरोपित तत्कालीन मुख्य अभियंता गोलेश चंद्र (रिटायर्ड), अभियंता एसएन शर्मा, अभियंता काजिम अली और अधीक्षण अभियंता शिवमंगल यादव (सेवानिवृत), अभियंता अखिल रमन, अभियंता कमलेश्वर सिंह, अभियंता रूप सिंह यादव (सेवानिवृत) व अधिशासी अभियंता सुरेश यादव के खिलाफ मनी लांर्डिंग का मुकदमा दर्ज किया हैं।

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