11 मौतों की मिस्ट्री से उठता जा रहा है पर्दा, ललित हो सकता है मास्टरमाइंड

नई दिल्ली: दिल्ली के बुराड़ी में 11 मौतों की मिस्ट्री से अब पर्दा हटता जा रहा है। दिल्ली पुलिस को संत नगर के घर से शवों के अलावा जो रजिस्टर बरामद हुआ, उसमें लिखा हर शब्द भाटिया परिवार की मौत को अंधविश्वास और मोक्ष की प्राप्ति के लिए उठाए कदम की ओर ले जा रहा है। इस रजिस्टर में लिखी बातों से अब तक की जांच में ये बात सामने आ रही थी कि भाटिया परिवार के छोटे बेटे यानी ललित ने पूरे परिवार की मौत की पटकथा लिखी है। जांच टीम को सबूत मिले हैं कि रजिस्टर में मौत की कहानी ललित के हाथों से लिखी है। अब पता चला है कि ललित के पिता ही उसका मार्गदर्शन कर रहे थे।

वो पिता जो इस दुनिया से पहले ही जा चुके हैं, वही सपने में आकर ललित को बताते थे कि क्या करना है और कैसे करना है। ललित दिमागी रूप से पूरी तरह ठीक नहीं था और तंत्र-मंत्र की क्रियाओं से जुड़ा था। ललित के पिता की करीब 12 साल पहले मौत हो चुकी है। ललित परिवार के बाकी सदस्यों से कहता था कि पिता की आत्मा उसके अंदर आती है और उसे कुछ खास निर्देश देती है। ललित परिवार के लोगों से बताता था कि उसके पिता की आत्मा उसे जो निर्देष देती है, वो सब कुछ वह रजिस्टर में लिखता है। ललित पिछले तीन साल से लगातार रजिस्टर में धार्मिक बातें लिख रहा था।

– रजिस्टर से क्या मिला

सूत्रों के अनुसार रजिस्टर में ऐसे ही बातें लिखी मिली हैं। रजिस्टर में लिखा है कि ‘पिताजी ने कहा कि आखिरी समय पर झटका लगेगा, आसमान हिलेगा, धरती हिलेगी, लेकिन तुम घबराना मत, मंत्र जाप तेज कर देना, मैं तुम्हें बचा लूंगा। जब पानी का रंग बदलेगा तब नीचे उतर जाना, एक दूसरे को नीचे उतारने में मदद करना। तुम मरोगे नहीं, बल्कि कुछ बड़ा हासिल करोगे।’ यानी ललित को अपने पिता से इस बात के निर्देश मिल रहे थे कि क्या करना और कैसे करना है।

11 पाइपों का पूजा से संबंध

पुलिस सूत्रों के अनुसार ललित लंबे समय से मौन व्रत धारण किए हुए था और सबकुछ रजिस्टर में लिखकर बताता था। घटना वाले दिन ललित ने परिवार के बाकी लोगों को बताया कि उसके पिता ने उसे बड़ पूजा करने के लिए निर्देश दिए हैं और यह पूजा शनिवार रात को 1.०० बजे के बाद होगी। ललित ने बताया कि रात को करीब 10 से 15 मिनट की बड़ पूजा होगी और इसके लिए परिवार के सभी सदस्यों के हाथ, मुंह, आंख और कान बंद किए जाएंगे। पूजा के लिए सभी को गले में चुन्नी बांधकर स्टूल पर खड़े होकर लटकना होगा और पूजा खत्म होने के बाद सब अपने हाथ खोल सकते हैं।

ललित ने इस पूजा के लिए सभी को पहले से ही रजिस्टर में लिखकर निर्देष दिए। उसने बाजार से 9 नई चुन्नियां खरीदीं और हर सदस्य के लिए लटकने की जगह तय कर दी। परिवार के सदस्यों ने रजिस्टर में लिखे निर्देषों के मुताबिक खुद को फंदे से लटका लिया। घर की बाहरी दीवार की तरफ निकले ११ पाइपों का भी इसी पूजा से संबंध हो सकता है। पुलिस का मानना है पूजा के दौरान ललित ने सबके स्टूल हटा दिए और इसके बाद मां के साथ आत्महत्या कर ली।

रजिस्टर में ‘वट सावित्री पूजा’ का भी जिक्र

रजिस्टर में पिता के सपने वाली थ्योरी के अलावा एक और जानकारी मिली है। रजिस्टर में ‘वट सावित्री पूजा’ का भी जिक्र किया है। मान्यताओं के मुताबिक यह वह तपस्या है, जिसमें सावित्री ने वट वृक्ष (बरगद का पेड़) के नीचे पड़े अपने मृत पति सत्यवान को यमराज से जीत लिया था। जिसके बाद से ही सावित्री के दृढ़ निश्चय व संकल्प की याद में महिलाएं अपने दीर्घ और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना के साथ वट वृक्ष की पूजा की हैं। वट तपस्या के तहत लोग उस स्थिति में आते हैं, जैसे बरगद के पेड़ के नीचे उसकी शाखाएं झूलती रहती हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार रजिस्टर में लिखी बातों और मौका-ए वारदात से ये पता चलता है कि दरअसल पूरा परिवार एक अनुष्ठान कर रहा था। हाथ और मुंह पर पट्टी बांधकर लटकना इसी अनुष्ठान का अंतिम चरण था। परिवार को शायद ये विश्वास था कि वो बच जाएंगे।

रजिस्टर में लिखी बातों से इस बात के भी संकेत मिले हैं कि हो सकता है भाटिया परिवार ‘वट तपस्या’ करने का प्रयास कर रहा हो। रजिस्टर में लिखा कि अगर कोई कुछ खास रीतियों का पालन करता है तो उनकी समस्याएं सुलझती हैं और भगवान खुश होता है। जिस स्थिति में परिवार के लोगों के शव लटके मिले हैं, वो भी कुछ ऐसी ही तस्वीर पेश कर रहे हैं। ये तपस्या एक और मायने में अहम मानी जा रही है। वट सावित्री पूजा पूर्णिमा के दौरान की जाती है और बीते 27-28 जून को पूर्णिमा थी।

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