लोहिया, जनेश्वर के बाद अब आंबेडकर जयंती भी मांएगी सपा

राजनीति बदली तो मिजाज भी बदल गए। 36 के आंकड़े जब 63 में बदल गये तो समाजवादी पार्टी किसोच भी बदलगायी। जैसे ही फूलपुर और गोरखपुर में बसपा के सहयोग से सपा की जीत हुई आंबेडकर के प्रति सपा की समझ भी बदल गयी। कल तक जो सपा केवल राममनोहर लोहिया और जनेश्वर मिश्रा की जयंती ही बड़े धूमधाम से मनाती थी, अब अंबेडकर की जयंती भी धूमधाम से मनाने जा रही है। इसकी पूरी तैयारी कर ली गयी है और जिला इकाई को कह दिया गया है कि अबकी बार से दलितों के मसीहा और संविधान के रचैता डॉ अंबेडकर की जयंती भी धूमधाम से मनाई जायेगी। सपा के लोग इस काम में जुट गए हैं और अंबेडकर जयंती की तैयारी कर रहे हैं। बता दें की 14 अप्रील को अंबेडकर जयंती है। सपा के लोग इस दिन देश वासियों और प्रदेश वासियों को डॉ अंबेडकर के कृतित्व और व्यक्तित्व पर कई कार्यक्रम भी करेंगे और लोगों को बताएँगे कि अंबेडकर आज भी क्यों महत्वपूर्ण है।

सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने बताया कि बाबा साहेब आंबेडकर की 127 वां जन्मोत्सव 14 अप्रैल को है। पार्टी के सभी जिला मुख्यालयो को निर्देशित किया गया है कि वह बाबा साहेब के जन्मोत्सव पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन करे और श्रध्दांजलि अर्पित करते हुये उनके कार्यो के बारे मे कार्यकर्ताओ और जनता को जानकारी दे। हालांकि बहुजन समाज पार्टी प्रत्येक वर्ष बाबा साहेब की जयंती बड़े धूम धाम से मनाती है और पार्टी सुप्रीमो मायावती और पार्टी कार्यकर्ता बाबा साहेब को श्रध्दांजलि देते है और उन्हें याद करते है।

पार्टी प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि ‘ऐसा कहना गलत होगा कि हम पहली बार अंबेडकर जयंती मना रहे है। पार्टी हमेशा बाबा साहेब के जन्मोत्सव और पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रध्दांजलि देती है। हम उन्हें सम्मान पूर्वक याद करते है। ‘ उधर भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि ‘यह एक बड़ा नाटक है .सपा ने जबसे हाथी :बसपा का चुनाव चिन्ह: को दोस्त बनाया है, तब से इन्हें दलितो की चिंता हो गयी है। लेकिन प्रदेश के दलित उस दिन को नही भूले है जब 2012 में अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने थे और किस तरह से उनकी झोपडियां और घर जला दिये गये थे। ‘

सपा और बसपा के बीच बढ़ती नजदीकियां बीजेपी को नहीं सुहा रही। लेकिन राजनीति तो अपने चाल से ही चलती है। सपा का आंबेडकर प्रेम भले ही अभी नया हो लेकिन यह तो सच है कि आंबेडकर ने बंचितों और दलितों के जितना भी किया ,उसे भुलाया नहीं जा सकता।

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