12 साल बाद सोमवती अमावस्या को शुभ संयोग, आज करें पितृ दोष का निवारण

नई दिल्ली: सोमवती अमावस से तात्पर्य यह होता है कि किसी भी माह की अमावस्या जब सोमवार के दिन होती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है. यह अमावस्या पितरों के तर्पण कार्यो के लिये सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है. इस दिन व्रत भी किया जा सकता है जिसका शुभ फल आपके कर्मों को शुभता प्रदान करने वाला होता है.सोमवार शिव उपासना का दिन है तथा इस दिन शिव एवं हनुमान जी की पूजा उपासना काल, भय, पीड़ा और रोग निवारण में प्रभावी मानी गई है और विशेषत: जब सोमवार के दिन अमावस्या का संयोग बन पडे़ तो शिव व हनुमान जी की पूजा करने से कठिनाईयों एवं उलझनों से छुटकारा प्राप्त होता है.

शास्त्रों में इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत कहा गया है इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा व पेड तले तेल का दीपक प्रज्जवलित करना चाहिए, इसी के साथ शनि देव की पूजा करनी चाहिए. इस दिन मंत्र जाप करना विशेष रुप से कल्याणकारी होता है.इसके अतिरिक्त इस दिन पीपल की 108 परिक्रमा कर, पीपल के पेड और श्री विष्णु का पूजन करने का नियम है. विवाहित स्त्रियां इस दिन अपने पतियों की दीर्घायु की कामना हेतु व्रत भी रखती है. इस दिन की गई पूजा उपासना से गोदान का फल प्राप्त होता है.

पौष महीने की अमावस्या को हिंदू पंचांग में बहुत खास माना जाता है. पौष माह में सूर्य धनु राशि में होते हैं जिससे यह माह बहुत अच्छा माना जाता है. अमावस्या के दिन प्रात:काल स्नान करना और दान देने शुभ माना जाता है. इस सोमवार 18 दिसंबर को सोमवती अमावस्या पड़ रही है. इससे पहले 2005 में सोमवती अमावस्या थी. 18 दिसंबर को पौष महीने में सोमवती अमावस्या 12 साल बाद पड़ रही है. यह संयोग इससे पहले साल 2005 में 10 जनवरी को था. कहा जाता है पौष सोमवती अमावस्या का यह शुभ संयोग बहुत ही फलदायी होता है. इस दिन पवित्र नदी में स्नान कर पूजा पाठ करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.

जिन लोगों की कुंडली में अमावस्या दोष, काल सर्प दोष या विष योग हैं वो लोग इस दिन उपाय से दोष को खत्म कर सकते हैं. पितरों को शांत करने के लिए यह अमावस्या बहुत ही महत्वपूर्ण है. इस दिन सूर्य देव को तांबे के बर्तन में गंगा जल में लाल चंदन मिलाकर ‘ओ पितृभ्य नमः ‘ का मंत्र पढ़ते हुए तीन बार अर्घ्य देना फलदायी माना जाता है. कहा जाता है इस उपाय से पितर शांत हो जाते हैं. इसके अलावा इस अमावस्या के दिन दान-पुण्य करने से पितर दोष खत्म हो जाते हैं. कहा जाता है इस दिन पितरों को शांत करने से घर मेंं सुख-शांति का वास होता है.

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