रॉबर्ट वॉड्रा को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका, स्काईलाइट हास्पिटैलिटी एलएलपी की याचिका खारिज

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वॉड्रा को बड़ा झटका देते हए उनकी साझेदारी वाली कंपनी स्काईलाइट हास्पिटैलिटी एलएलपी की याचिका खारिज कर दी है। स्काईलाइट हास्पिटैलिटी एलएलपी ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका की थी। जस्टिस एके सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने ये फैसला किया।

दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले 15 फरवरी को स्काईलाइट हास्पिटैलिटी एलएलपी की ओर दायर याचिका को खारिज कर दिया था। स्काईलाइट हास्पिटैलिटी एलएलपी ने याचिका दायर कर कंपनी के नाम पर जारी किए गए रि-असेसमेंट नोटिस को चुनौती दी थी। एलएलपी को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में तब्दील कर दिया गया था।

कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2010-11 में हरियाणा और राजस्थान में हुए भूमि सौदे के फायदे के रि-असेसमेंट की मांग की थी। आयकर विभाग ने हाईकोर्ट के समक्ष रखी गई टैक्स चोरी से जुड़ी रिपोर्ट में कहा था कि कंपनी ने 2010-11 के दौरान कमाए गए लाभ में से 35 करोड़ रुपये को असेसमेंट से बचा लिया था। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस चंद्रशेखर की बेंच ने आयकर विभाग की रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए कहा कि यह मानने के कई कारण हैं कि आय को मूल्यांकन से बचाया गया।

कंपनी ने आयकर विभाग के नोटिस को चुनौती देते हुए कहा था कि नोटिस सिर्फ शक के आधार पर दिया गया। इससे यह साबित नहीं होता कि आय को मूल्यांकन से बचाया गया है। कंपनी के इस दावे को कोर्ट ने खारिज करते हुए कहा कि नोटिस जारी करने के लिए पर्याप्त वजह मौजूद हैं। हाईकोर्ट ने कंपनी की उस याचिका को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि आयकर विभाग ने गलत कंपनी को नोटिस भेजा।

स्काईलाइट हास्टपिटैलिटी पर बीकानेर में गलत तरीके से सैकड़ों एकड़ जमीन हथियाने का आरोप है। राजस्थान के सीमावर्ती इलाके बीकानेर में जमीन खरीदने के चार मामलों में महेश नागर स्काईलाइट हास्पिटैलिटी का अधिकृत प्रतिनिधि था। पॉवर आफ अटार्नी के जरिये सैकड़ों एकड़ जमीन स्काईलाइट हास्पीटलिटी को बेचने के मामले में महेश नागर की अहम भूमिका थी।

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