मुलायम परिवार में बनी एकता, गढ़े गए नए समीकरण

लखनऊ ब्यूरो: अंत भला तो सब भला। यह कहावत अभी वर्तमान में मुलायम परिवार पर चरितार्थ होती दिख रही है। सूबे का यह महायादव राजनीतिक परिवार फिर से एक हो गया है समाजवादियों के लिए इससे बड़ी खबर और क्या हो सकती है। सपा विरोधी दल को भले ही इस एका से परेशानी दिख रही हो लेकिन सूबे की यादव, मुस्लिम आबादी के साथ ही बहुत सारे पिछड़े और दलित समाज भी खुश होते दिख रहे हैं। खासकर सपा का बसपा के साथ गठबंधन को लेकर सूबे की राजनीति एक अलग अंदाज की होती दिख रही है। इस गठबंधन को सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने भी हरी झंडी दे दी है तो अखिलेश के चाचा शिवपाल यादब की भी सहमति मिल गयी है। इस ऐलान के बाद अब अखिलेश की राजनीति तेजी से आगे बढ़ेगी और अखिलेश के नेतृत्व में ही सपा के लोग राजनीति करेंगे ,यह लगभग तय हो गया है।

माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव का अपने बेटे को सपा का एकछत्र राज देने का अभियान पूरा हो गया है।इसे पूरा करने के लिए मतभेद का ड्रामा रचा गया था। इस ड्रामे की शुरुआत और अंत की जानकारी मुलायम सिंह को थी तो शिवपाल यादव को भी थी। अखिलेश तो पहले से ही सब जानते थे। चुकी पार्टी में कोई विद्रोह नहीं हो इसलिए यह सब तय समय के लिए किया गया था। हाँ इस ड्रामे में पार्टी को चुनाव के दौरान जो कीमत चुकानी पड़ी इसका भान शायद किसी को नहीं था, मुलायम सिंह भी यह समझ नहीं पाए थे कि विधान सभा चुनाव में पार्टी की हालत ख़राब हो जायेगी। लेकिन यह सब हुआ।

तो सच यही है कि सपा महाभारत के बाद अंत में अखिलेश का कथित तौर पर विरोध कर रहे शिवपाल यादव भी मान गए हैं और बताया जा रहा है कि उनको जल्दी ही पार्टी में कोई बड़ा पद दिया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि उनको पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया जा सकता है। कुछ समय पहले तक वे बागी थे और उन्होंने सेकुलर मोर्चा नाम से अलग संगठन भी बना लिया था। वे दावा कर रहे थे कि मुलायम सिंह यादव उनकी पार्टी के अध्यक्ष बनेंगे। पर अंततः वे अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली पार्टी में रहने वाले हैं।

इस तरह अंततः पार्टी और परिवार में कथित झगड़े का समापन हो गया है। कई जानकारों का कहना है कि असल में कोई झगड़ा था ही नहीं। परिवार के सारे सदस्य किसी न किसी रूप में आपस में जुड़े थे। शिवपाल ने अखिलेश और रामगोपाल यादव के खिलाफ मोर्चा खोला था, तब मुलायम सिंह और शिवपाल एक साथ थे और उस समय मुलायम अपने बेटे अखिलेश के साथ भी थे। बाद में अखिलेश और शिवपाल के बीच सुलह हुई और फिर अब शिवपाल और रामगोपाल यादव के बीच सुलह हो गई है।

पिछले दिनों शिवपाल यादव ने रामगोपाल यादव से मुलाकात की और उसके बाद ही उनके महासचिव बनने की चर्चा शुरू हो गई। सो, अब मुलायम सिंह के परिवार में नए समीकरण बन रहे हैं। अखिलेश परिवारवाद के आरोपों से बचने के लिए अपनी पत्नी डिंपल यादव को इस बार चुनाव नहीं लड़ाएंगे। लेकिन खबर है कि रामगोपाल यादव इस बार संभल सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ सकते हैं। यह भी कहा जा रहा है कि शिवपाल यादव भी चुनाव लड़ सकते हैं और उनके बेटे को पार्टी अगले चुनाव में विधानसभा का चुनाव लड़ाएगी।

अभी तक उनका परिवार स्थानीय निकाय की राजनीति में सक्रिय था। माना जा रहा है कि यह मुलायम परिवार का नया समीकरण है। इस समीकरण के आगे और तेज किया जाना है और परिवार को मजबूत बनाकर पार्टी को आगे बढ़ाना है। अखिलेश की नजर अब अगले लोक सभा चुनाव पर टिकी है और माना जा रहा है कि सपा बसपा के मेल के बाद पार्टी को मजबूत आधार मिल सकेगा।

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