20 साल का हुआ वियाग्रा, इत्तेफाक से हुई खोज, फिर मिली रातोंरात पहचान

न्यूयॉर्क: अमेरिका में 20 साल पहले वियाग्रा का जन्म हुआ था। अब वियाग्रा को करोड़ों रुपयों में बेचा जा रहा है। इतना ही नहीं अब यह प्रोडक्ट अपने निर्माता फिजर के लिए कमाई का बढ़िया जरिया बन गया है। अब तो दुनिया के अलग-अलग देशों में इस प्रोडक्ट को कॉपी भी किया जा रहा है। 1990 के दशक के शुरुआत में फिजर छाती में संक्रमण के इलाज के लिए एक नई दवा ‘सिल्डेनाफिल’ पर एक्सपेरिमेंट कर रहे थे।

इस दवा से छाती के दर्द को कम करने में तो कोई मदद नहीं मिली। लेकिन उन्हें साइड इफेक्ट का सामना जरूर करना पड़ा। इससे उन्हें निजी अंग में इरेक्शन की समस्या का सामना करना पड़ता था। हालांकि इस एक्सपेंरिमेंट में शामिल किए गए पुरुषों ने बेहतर सेक्स लाइफ की बात बताई। इसके बाद फिजर ने चेस्ट इंफेक्शन पर इलाज की जगह नपुंसकता की समस्या, जिससे 40 के बाद की उम्र के लगभग एक तिहाई पुरुष जूझ रहे हैं, पर रिसर्च करने की ठानी और आखिरकार 27 मार्च 1998 को यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन एजेंसी (एफडीए) ने इस ट्रीटमेंट को हरी झंडी दिखाई और अप्रैल में छोटी सी दिखने वाली नीली दवा यूएस स्टोर में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने लगी। इस दवा को सफलता भी तुरंत मिली।

बिक्री के पहले दो हफ्ते में ही अमेरिका में इसको लेकर 150 हजार प्रिस्क्रिप्शन लिखे गए। इसके अलावा बिकने से पहले ही वियाग्रा ने दुनियाभर का ध्यान खींचा। इजराइल, पोलेंड और सऊदी अरब में तो इसकी ब्लैक मार्केटिंग भी होने लगी और अमेरिका में बिकने वाली कीमत से पांच गुना ज्यादा कीमत पर इसे खरीदा जाने लगा। उस समय अमेरिका में वियाग्रा की कीमत 10 डॉलर थी। हालांकि कई दवा कंपनियों ने इसकी नकल करने की भी कोशिश की। साल 2011 में फिजर के सर्वे के मुताबिक ऑनलाइन खरीदी जाने वाली 80 प्रतिशत वियाग्रा नकली होती है।

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