2017 रहा राजनीतिक उथल-पुथल वाला वर्ष

नई दिल्ली: 2017 दुनियाभर के लिए राजनीतिक उथल-पुथल का वर्ष रहा है। कुछ भूचाल तो ऐसे आए, जिनकी वजह से दुनिया मानो हिल ही गई। अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप ने हिलेरी क्लिंटन को हरा दिया, जो दुनिया के लिए अविश्वसनीय था। यह किसी ने भी शायद ही सोचा होगा कि एक कट्टर छवि वाले शख्स को अमेरिका की जनता चुनाव जिता सकती है।

दूसरी तरफ ब्रिटेन का यूरोपीय यूनियन से अलग होना और डेविड केमरन का प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा देना भी अविश्वसनीय था। मार्गरेट थैचर के बाद थेरेसा मे ब्रिटेन की दूसरी महिला प्रधानमंत्री बनीं, ता एंजेला मार्केल ने चौथी बार जर्मन चांसलर का चुनाव जीता। दुनिया ने 2017 में कई आतंवादी हमले भी झेले हैं, जिनमें से मैनचेस्टर, लास वेगास और सोमालिया में हुए हमले ज्यादा भयावह थे। एशिया में रोहिंग्या संकट से लेकर कोरियाई प्रायद्वीप जैसे तमाम विवाद छाए रहे।

अमेरिका:-

बात अगर अमेरिका की ही करें, तो 2017 की शुरुआत वहां ट्रंप युग के साथ हुई। 70 साल के अरबपति रिपब्लिकन नेता डोनाल्ड ट्रंप ने हिलेरी क्लिंटन को हराकर 20 जनवरी को अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। उन्होंने ‘अमेरिका फर्स्ट’ का नारा देकर सत्ता में आते ही बराक ओबामा सरकार की तमाम नीतियों को बदल दिया। ट्रंप ने आते ही जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते को मानने से इंकार कर दिया। उसके बाद उन्होंने अमेरिका की मुक्त व्यापार नीति, ईरान के साथ परमाणु समझौते और अप्रवासी नीति को बदलने की घोषणा कर दी। ट्रंप प्रशासन और उत्तर कोरिया के बीच पूरे साल तनातनी चलती रही और साल के अंत में ट्रंप ने येरुशलम को इजराइल की राजधानी की मान्यता दे दी।

ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन:-

ब्रिटेन ने जून-2017 में यूरोपीय यूनियन से अलग होकर पूरी दुनिया में हड़कंप मचा दिया। इस घटना को ब्रैक्जिट के नाम से जाना गया, जिसके लिए ब्रिटेन में जनमत संग्रह हुआ, जिसमें 51.9 प्रतिशत नागरिकों ने यूरोपीय यूनियन से अलग होने के पक्ष में वोट किया, जबकि 48.1 प्रतिशत नागरिकों ने ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन में बने रहने के पक्ष में। ब्रैक्जिट के बाद प्रधानमंत्री डेविड केमरन को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा, क्योंकि वह ब्रैक्जिट के खिलाफ थे। उनके बाद थेरेसा में ब्रिटेन की प्रधानमंत्री बनीं। ब्रैक्जिट पर ठीक से अमल कराने के लिए उन्होंने मध्यावधि चुनाव कराया, लेकिन उनकी पार्टी का बहुमत और कम हो गया।

रोहिंग्या संकट:-

रोहिंग्या मुद्दा इस साल का सबसे बड़ा मानवीय संकट बन कर उभरा। म्यांमार से इस साल अगस्त से शुरू हुआ रोहिंग्याओं का पलायन अब भी जारी है। वहां की आर्मी द्वारा किए अत्याचार के बाद लाखों रोहिंग्याओं को बांग्लादेश में शरण लेनी पड़ी है। यह संकट दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय सकंट माना जा रहा है। इसके लिए दुनिया भर के कई देशों ने म्यांमार की निंदा की है।

जिम्बाब्वे:-

अफ्रीकी देश जिम्बाब्वे में रॉबर्ट मुगाबे राज का अंत हो गया। वहां 37 साल से राज कर रहे 93 साल के मुगाबे को सेना के दखल के बाद सत्ता छोड़नी पड़ी। सेना ने 16 नवंबर की रात को हरारे में रॉबर्ट मुगाबे और उनकी पत्नी ग्रेसी को उनके घर में नजरबंद कर दिया। उन पर जिम्बाब्वे के संविधान के मुताबिक गंभीर दुर्व्यवहार, नाकाबिलियत और संविधान की अनदेखी करने का आरोप लगा था। सेना ने कुछ दिन के लिए सरकार की सारी शक्तियां अपने हाथ में लेने के बाद जिम्बाब्वे की सत्ता को एमिर्सन मंगागवे के हाथों सौंप दी।

उत्तर कोरिया:-

इस साल दुनिया को अगर किसी ने सबसे ज्यादा डराया है तो वह है उत्तर कोरिया। उसने कुल 14 मिसाइलों का परिक्षण किया और एक हाइड्रोजन बम का भी। उसकी वजह से न सिर्फ कोरियाई प्रायद्वीप, बल्कि पूरी दुनिया में तनाव पैदा हुआ और अमेरिका को उस पर रोज नए प्रतिबंध लगाने पड़े। लेकिन किम जोंग उन पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। उसने तो यहां तक दावा किया कि उसके पास अमेरिका के तट पर पहुंचने वाली मिसाइल भी है। 29 नवंबर को जापान सागर के ऊपर एक और मिसाइल लॉन्च कर उत्तर कोरिया ने साबित कर दिया कि इस क्षेत्र में तनाव अभी जारी रहेगा।

आतंकी हमले:-

इस साल मैनचस्टर से लेकर सोमालिया तक आतंकी हमले हुए और दुनिया को इस मुद्दे पर नए सिरे से सोचने के लिए मजबूर होना पड़ा। लंदन के मैनचेस्टर, अमेरिका के लास वेगास और सोमालिया के मोगादिशू की घटना सबसे अधिक भयावह थी। मई में ब्रिटेन के मैनचेस्टर में एक पॉप कंसर्ट के बाद हुए धमाके में 22 की मौत और 60 लोग घायल हो गए। अक्तूबर में अमेरिका के लास वेगास में एक बंदूकधारी ने मांडले बे रिसॉर्ट मे कसीनो पर हमला कर 58 लोगों को मार दिया और करीब चार सौ लोगों को घायल कर दिया। अफ्रीकी मुल्क सोमालिया की राजधानी मोगादिशू में अक्तूबर में बहुत ही भयनाक आतंकी हमला हुआ, जिसमें पांच सौ से ज्यादा लोगों की मौत और तीन सौ से ज्यादा घायल हो गए। इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन अल-शबाब ने ली थी।

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