2019 को आते देख 2014 के घोषणा पत्र को खंगाल रहे हैं पीएम मोदी और अमित शाह

अखिलेश अखिल

जैसे जैसे 2019 की तारीखें नजदीक आ रही है सत्तारूढ़ बीजेपी की धड़कने बढ़ रही है। यह बात और है कि पीएम मोदी के प्रति अभी भी जनता का लगाव बना हुआ है और माना जा रहा है कि 2019 के चुनाव परिणाम भी बीजेपी के पक्ष में जा सकते हैं। लेकिन बीजेपी को इस पर चैन नहीं। उसे यह भी पता है कि वक्त कब किसके साथ क्या करे और खासकर राजनीतिक पार्टी के साथ ,यह कौन जाने ? बीजेपी किसी तरह का रिस्क लेना नहीं चाहती। पार्टी के बहुतेरे नेताओं को यह भी पता है कि पिछले तीन सालों में जनता को वह सबकुछ नहीं मिला जिसके वादे किये गए थे।

भ्रष्टाचार आज भी चरम पर है। ठग और दलाल के आज भी पाव बारह है। नोटबंदी ,जीएसटी के मामले निश्चित रूप से लोगों को घायल किये हैं और बड़ी संख्या में बेकारी बढ़ी है। सरकार के लोग भी यह मान रहे हैं कि बहुत कुछ करना बाकी रह गया है। जो कहा गया था वह नहीं हुआ और जो नहीं कहा गया था वह सब हो गया। इधर राफेल कांड ,बैंक घोटाला सरकार की पूरी साख पर सवाल उठा दिए हैं। हिन्दू -मुसलमान ,गाय और गोरक्षा से लोग अब ऊब से गए हैं और मंदिर की राजनीति लोगों को अब आकर्षित नहीं करती।

सरकार को यह भी पता है कि लोकतंत्र का चौथा खम्भा मीडिया से जुड़े अधिकतर लोग सरकार और उसकी नीति को बेहतर नहीं मानते। किसानो की अपनी समस्या आज भी कायम है और आम आदमी भी मुश्किल दौर से गुजर रहा है। ऐसे में अपनी सरकार को पुनः वापस लाने में बीजेपी को बहुत सारे खेल करने की जरूरत है। इसी जरुरत को भांपते हुए भारतीय जनता पार्टी ने बड़े पैमाने पर 2014 के लोक सभा चुनाव के दौरान पेश अपने घोषणा पत्र के वादों को खंगालने की क़वायद शुरू की है।

जो ख़बरें मिल रही है उसके मुताविक ख़ास तौर पर देखा जा रहा है कि जो वादे 2014 के चुनाव किए गए थे उनमें से कितने किस स्तर तक पूरे हुए और कौन-कौन से अधूरे रह गए। खबर मिल रही है कि तमाम मंत्रालयों से सरकार को जो फीड मिली है उससे पीएम मोदी बहुत खुश नहीं है। पार्टी अध्यक्ष भी नाराज बताये जा रहे हैं। ख़राब प्रदर्शन को देखते हुए अब नए सिरे से क़वायद पार्टी और सरकार दोनों स्तरों पर की जा रही है। और इसकी निगरानी ख़ुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल में सभी कैबिनेट मंत्रियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने विभागों की उपलब्धियों की सूची बनाकर पेश करें। इसमें ख़ास तौर पर यह ध्यान रखा जाए कि 2014 में पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में जो वादे किए थे उनकी क्या स्थिति है।

बताया जाता है कि प्रधानमंत्री के निर्देश के बाद पिछले महीने ही सभी मंत्रियों ने अपना लिखित उत्तर पेश कर दिया है। एक कैबिनेट मंत्री इसकी पुष्टि करते हुए बताते हैं, ‘कुछ मंत्रियों ने यह जानकारी भी दी है कि वे आने वाले कुछ महीनों में और कौन-कौन सी परियोजनाएं शुरू करने वाले हैं। साथ ही लंबित परियोजनाओं की भी उनके कारणों सहित जानकारी दी गई है.’ इसके बाद अगले चरण की कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है। सूत्रों की मानें तो प्रधानमंत्री ने एक वरिष्ठ मंत्री को ज़िम्मेदारी सौंपी है कि वे सभी मंत्रियों द्वारा पेश सूचियाें काे संकिलत करें।

उसका अंतिम दस्तावेज़ तैयार करें। इस पर प्रधानमंत्री अंतिम चरण में समीक्षा करेंगे। फिर इसे आम जनता के सामने पेश किया जाएगा। एक अन्य मंत्री के मुताबिक, ‘जैसा प्रधानमंत्री ने वादा किया है उसी के अनुसार 2019 के चुनाव से पहले हम आम लोगों को इसकी विस्तृत जानकारी देंगे कि हमने 2014 में जो वादे किए थे उनमें से एक-एक को किस गंभीरता से पूरा किया है। इसी के आधार पर अगली बार के लिए जनसमर्थन मांगेंगे।’

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