2019 चुनाव – पांच चेहरों के बीच भ्रमित जनता

दिल्ली ब्यूरो: मौजूदा चुनाव में राजनीतिक नर्तन देख जनता भ्रमित है और अचंभित भी। जो कल तक मोदी के गुण गए रहे थे ,आज मौन है या फिर दूसरे नेता के साथ खड़े होते दिख रहे हैं। जातीय राजनीति सब पर भारी है और नए मतदाता जात से बिलग होकर बहुत कुछ परख रहा है। जनता के सामने चेहरों की भी राजनीति है। इसे छलावा भी कहा जा सकता है। पांच चेहरों के बीच फसी जनता का निर्णय क्या होगा यह कौन बताये !

68 वर्षीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस चुनाव का सबसे बड़ा चेहरा हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत किया और विदेशों में देश का गौरव बढ़ाया है। वहीं उनके विरोधी उन पर नफरत की राजनीति करने के साथ साथ जनता से किए वादों को ना निभाने का आरोप लगाते हैं। इस बार मोदी के सामने पिछले चुनाव में मिले जबरदस्त समर्थन को बचाए रखने की चुनौती है।

दूसरे चेहरा है राहुलगांधी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी प्रधानमंत्री मोदी को टक्कर दे रहे हैं। 48 वर्षीय राहुल गांधी आम चुनाव में पहली बार कांग्रेस का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके ऊपर पार्टी में जान फूंकने की जिम्मेदारी है जिसे पिछले आम चुनाव में सिर्फ 44 सीटें मिली थीं। हालिया विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को कई राज्यों में कामयाबी मिली, लेकिन अब भी कम लोगों को विश्वास है कि वह मोदी को सत्ता से बाहर कर पाएंगे।

उधर एक तीसरा चेहरा अमित शाह का है। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को प्रधानमंत्री मोदी का सबसे विश्वासपात्र और सफल चुनावी रणनीतिकार माना जाता है। मोदी के प्रधानमंत्री बनने के साथ ही उन्हें पार्टी अध्यक्ष की कुर्सी मिल गई। गुजरात सरकार में गृह राज्य मंत्री रहते हुए उन पर कई फर्जी मुठभेड़ें कराने के आरोप लगे। लेकिन सबूतों के अभाव में ऐसे सभी मुकदमे बंद हो गए। 2019 के चुनाव 54 वर्षीय अमित शाह के लिए एक कड़ी परीक्षा माने जा रहे हैं।

चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकीं मायावती फिलहाल भारत में दलित राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा हैं। यह वर्तमान राजनीति का चौथा चेहरा है। पिछले आम चुनाव में उनकी पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई। फिर भी 63 वर्षीय मायावती पर इस बार सबकी नजरें टिकी हैं। वह कभी उनकी कट्टर प्रतिद्वंद्वी रही समाजवादी पार्टी के साथ चुनावी मैदान में उतरी हैं. चुनावी पंडित कह रहे हैं कि त्रिशंकु संसद की स्थिति में मायावती किंगमेकर बन सकती हैं।

उधर कांग्रेस से अलग होकर खुद को स्थापित करने वाली ममता बनर्जी किसी राजनीतिक चमत्कार से कम नहीं हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल में कई दशकों से जमे वामपंथियों की सत्ता को खत्म किया और 2011 से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं। 64 वर्षीय ममता बनर्जी की गितनी इस वक्त प्रधानमंत्री मोदी के सबसे बड़े आलोचकों में होती हैं। पिछले आम चुनाव में उनकी पार्टी ने पश्चिम बंगाल की कुल 42 सीटों में से 34 सीटें जीती थीं।

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