2019 लोकसभा चुनाव: बीजेपी जीतेगी लेकिन मोदी पीएम नहीं बनेंगे !

अखिलेश अखिल

इस बात में कोई दो राय नहीं कि अगला लोकसभा चुनाव बीजेपी नहीं जीतेगी। अभी तक बीजेपी और पीएम मोदी के प्रति देश के जनमानस के भीतर जैसा जज्बा और प्रेम बना हुआ है उससे साफ़ लगता है कि अगले लोकसभा चुनाव में बीजेपी देश की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आएगी और संभव है कि उसकी सरकार भी बनेगी। लेकिन यह भी तय है कि तब बीजेपी को 280 से ज्यादा सीटें नहीं मिल पाएगी। अगर बहुमत नहीं मिलने की हालत में बीजेपी आ गयी तो यह भी साफ़ है कि नरेंद्र मोदी का प्रधानमन्त्री बनाना आसान नहीं होगा। यह बात इसलिए कही जा सकती है कि ना तो बीजेपी या मोदी के पास अब कोई ऐसा मुद्दा बनता दिख रहा है जिसे लोगों के बीच ले जाकर जनता को मोहित कर सके और साथ ही यह भी तय है कि बदलती राजनीति में आज के एनडीए घटक दल बीजेपी के साथ रह पाएंगे। बीजेपी के समर्थन में नया घटक दल बनेगा और वह घटक दल किसी भी सूरत में मोदी के समर्थन में नहीं जाएगा। लेकिन याद रखिये यह सब तब होगा जब बीजेपी को 250 से कम सीटें आएंगी और जिसकी संभावना अधिक है।

पहली बात तो यह समझें कि 2014 जैसी हवा अब नहीं बन सकती।बीजेपी का सपना था कि भारत कांग्रेस मुक्त हो। बदलते परिवेश में बीजेपी ने ऐसा कर भी दिखाया। अब जो हमले होने हैं वह बीजेपी पर ही होने हैं। नए नए इलाके में बीजेपी ने अपना जनाधार बढ़ाया है और उसकी फसल भी काट ली है। लेकिन बीजेपी के इस खेल में कई पार्टियों की जमीन भी खिसक गयी है। वह पार्टी बीजेपी को आगे बढ़ने से रोकेगी। ऐसे ही माहौल में भाजपा 190 से 230 सीटों के बीच अटकेगी या इससे कुछ ज्यादा लेकिन बहुमत के लिए 273 सीट से कम। इस बीच पूर्वोत्तर में बीजेपी को भरी सफलता जरूर मिली है लेकिन यह भी सच है कि मोदी और शाह का ग्राफ निचे भी गिरा है। कई मसलों को लेकर सरकार के प्रति लोगों में शक भी पनप गया है। इधर कई राज्यों के क्षत्रप भी परेशान है।

सियासी हवा को समझने में नंबर एक आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडु ने भाजपा से दूरी बनाना शुरू कर दिया है। टीआरएस के चंद्रशेखर राव भी पहली बार खुल कर मोदी सरकार के खिलाफ बोले हैं। मोदी एंड पार्टी की बैंक लूट पर शिवसेना ने जो जिस तरह का तल्ख हमला बोला है उससे इतना साफ है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद ये पार्टियां नरेंद्र मोदी की समर्थक नहीं होंगी। मतलब यदि भाजपा 250 से कम सीटे जीती तब उद्दव ठाकरे, चंद्रबाबू नायडु, चंद्रशेखर राव, नीतीश कुमार यह स्टेंड ले सकते हैं कि हमारा समर्थन तब मिलेगा जब भाजपा नया नेता चुने। और ऐसा भाजपा ने यदि 200 सीटे जीती तो उस हैसियत में तो अनिवार्यतः होगा।

पहली बात तो यह है कि 2019 में त्रिशंकु लोकसभा की संभावना है। भाजपा, कांग्रेस और लेफ्ट की धुरी के तीन मोर्चे अलग-अलग चुनाव लड़ेंगे और सवा दौ सो, डेढ़ सौ, डेढ़ सौ के औसत वाला जनादेश हुआ तो चुनाव के बाद पार्टियों के रिश्ते नए सिरे से बनेंगे। उसमें नरेंद्र मोदी को दुबारा प्रधानमंत्री बनवाने वाली पार्टियों का टोटा होगा। यदि भाजपा की 225 से कम सीटे होती है तो भाजपा के भीतर, संघ परिवार में भी नरेंद्र मोदी लाओ, देश बचाओं वाले लोग नहीं होंगे। 250 सीटे यदि भाजपा जीत ले तब जरूर नरेंद्र मोदी, अमित शाह के लिए पैसे के दम पर पार्टियों को, नेताओं को मैनेज करना कुछ संभव है। पर यदि 225 या 200 के आसपास सीटें हुई तो नरेंद्र मोदी को कोई दूसरी पार्टी एलायंस नेता नहीं मानेगी।

उद्दव ठाकरे, चंद्रबाबू नायडु, नीतीश कुमार, चंद्रशेखर राव से ले कर नवीन पटनायक या करूणानिधी, मायावती, ममता बनर्जी सभी चाहेंगे कि नरेंद्र मोदी से पिंड छुड़ाया जाए। आखिर सब मुख्यमंत्रियों के अनुभव केंद्र से संसाधन, समर्थन आदि के मामले में मोदी सरकार से बहुत, बहुत खराब है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह के अंहकार में सब क्षत्रप और पार्टियां मन ही मन गांठ बांधे बैठी हैं। ऐसी हालत में संघ भी किसी दूसरे नेता को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा। फिर एनडीए के नए घटक दल जिसे चाहेंगे उस पर बाजी लगाएंगे। जो हालत दिख रहे हैं ऐसे में बीजेपी को 250 से कम सीटें आयी तो मोदी का पीएम बनाना आसान नहीं होगा।

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