2025 तक गुरुत्वीय तरंगें मापने वाला यंत्र बना दूसरा देश बनेगा भारत

नई दिल्ली: भारत लगातार नई कीर्तिमान स्थापित कर रहा हैं तो वहीं अब भारत 2025 तक गुरुत्वाकर्षण तरंगों को मापने वाला लिगो (लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रेविएशनल वेव आब्जर्वेटरी डिटेक्टर) यंत्र बना लेगा। अभी तक यह सुविधा केवल अमेरिका के पास मौजूद है। वहां इसकी दो प्रयोगशालाएं काम कर रही हैं। यंत्र को बनाने के बाद भारत अमेरिका के बाद इस उपलब्धि को पाने वाला विश्व का दूसरा देश बन जाएगा। भारत में यंत्र की स्थापना के लिए जगह का चयन कर लिया गया है,लेकिन नाम अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।

लिगो यंत्र ने पहली बार गुरुत्वीय तरंगों को खोजा था। 2016 में एक सुरंग में प्रयोग करके इसका पता लगाया था। 2017 का नोबल पुरस्कार इसी शोध के लिए दिया गया है। नोबल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने तकरीबन 100 साल पहले पहली बार इन तरंगों के बारे में बताया था। उसके बाद ही इस दिशा में शोध कार्य शुरू हो सके। अमेरिका ने दो लिगो यंत्रों को लंबे शोध के बाद तैयार किया था। इन्हें स्थापित भी कर लिया गया है। अमेरिकी वैज्ञानिकों का मानना है कि तीसरे यंत्र को पृथ्वी में किसी और जगह पर लगाया जाए तो बेहतरीन परिणाम हासिल होंगे।

ऐसे की जा रही तैयारी :

पुणे स्थित इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रो फिजिक्स के निदेशक सोमेक रॉय चौधरी का कहना है कि लिगो यंत्र तैयार होने के बाद उनकी संस्था इसके संचालन निगरानी का काम करेगी। इसके लिए भारी तादाद में युवाओं की जरूरत होगी। उनका कहना है कि इंदौर का राजा रमन्ना सेंटर व अहमदाबाद का प्लाज्मा रिसर्च सेंटर यंत्र के कल पुर्जों को तैयार कर रहा है। इसमें इस्तेमाल होने वाला दर्पण व अन्य जरूरी चीजें अमेरिका से आएंगी।

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