22 मिनट में मिट गई पति-पत्नी के बीच बनी 22 साल की दूरी

बेगूसराय: 1991 में शादी, 1993 में जुड़वा बच्चा। 1996 में तकरार और इसके बाद 22 साल की दूरी खत्म हो गई बस 22 मिनट में। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं| हकीकत है बेगूसराय जिला के नरेश महतो व सीता देवी की| इस दूरी को खत्म करवाया है परिवार परामर्श केंद्र बेगूसराय ने। 1991 में छौड़ाही प्रखंड के इजराहा निवासी दुर्गा महतो के पुत्र नरेश महतो की शादी हिंदू रीति-रिवाज के साथ धूमधाम से हसनपुर के पिरौना निवासी सीता देवी के साथ हुई थी। पति-पत्नी के बीच काफी बनाव भी था।

1993 में दोनों को जुड़वां पुत्र पैदा हुआ तो इसके बाद सीता को पति व ससुराल वालों से और अधिक प्यार मिलने लगा। लेकिन लड़का पैदा होने के बाद इस खुशी को किसी की नजर लग गई। ‘हम’ की लड़ाई में पति-पत्नी के बीच धीरे-धीरे दूरी बढ़ती गई। तीन साल बीतते-बीतते दूरी इतनी बढ़ गई कि पत्नी को मायके का सहारा लेना पड़ गया। ग्रामीण बुजुर्गों-पंचों ने कई बार दोनों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन, बात नहीं बनी तो सीता अपने मायके में ही रहने लगी। पति-पत्नी की लड़ाई में न केवल दोनों परिवार की दूरी बढ़ा दी, बल्कि दोनों जुड़वा भाइयों का जीवन भी अंधकारमय बना दिया।

समुचित शिक्षा एवं देखरेख नहीं होने के कारण दोनों बच्चे गलत संगत में पड़ गए। इनकी पढ़ाई छूट गई| वे मजदूर बन गए। लेकिन 22 साल बाद फिर से इस परिवार में खुशी लौटाई, पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में चल रहे परिवार परामर्श केंद्र बेगूसराय ने। 22 साल की जलालत भरी जिंदगी मायके में गुजारने के बाद पत्नी सीता देवी ने परामर्श केंद्र में आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई। उसके बाद थाना के माध्यम से पति नरेश को नगर थाना में संचालित महिला थाना बुलाया गया।

परामर्श केंद्र के सहयोगी महिला थाना अध्यक्ष राज रंजनी कुमारी, समाजसेवी दिलीप कुमार सिन्हा, पिंकी कुमारी, संगीता कुमारी, कुमारी मनीषा एवं सरिता देवी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी। पति-पत्नी के साथ दोनों के परिजनों को भी बुलाया गया था। कई स्तर पर बातचीत बाद दोनों सुलह-समझौता के लिए तैयार हुए। स्टाम्प पेपर पर बांड बना और सभी लोगों की उपस्थिति में पति-पत्नी ने एक दूसरे को गले लगाया। आजीवन साथ नहीं छोड़ने की कसमें खाई।

माता-पिता को मिलते देख दोनों जुड़वा भाई खुशी से उछल पड़े, उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े और कहा धन्यवाद परिवार परामर्श केंद्र। परामर्श केंद्र के सदस्य दिलीप कुमार सिन्हा ने बताया कि करीब पौने दो वर्ष से प्रत्येक शनिवार को यह परिवार परामर्श केंद्र संचालित किया जाता है। इस दौरान 250 से अधिक पति-पत्नी को बगैर किसी खर्च के मिलाकर बिहार में सबसे अधिक समझौता करवाया गया है।

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