5 आतंकियों को मारा, देश के लिए कुर्बान कर दी जान; शहीद मेजर को मिला शौर्य चक्र सम्मान

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकवादियों से लोहा लेने के दौरान एनकाउंटर में शहीद हुए मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल को भारत सरकार ने उनकी वीरता का इनाम दिया है। 2019 के पुलवामा आतंकवादी हमले में शहीद हुए सेना के मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल को सोमवार को एक सम्मान समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा शौर्य चक्र (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल ने पुलवामा आतंकी हमले के गुनहगार आतंकियों से लोहा लिया था और एक ऑपरेशन के दौरान पांच खूंखार आतंकियों को मारने के बाद देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल की पत्नी लेफ्टिनेंट नितिका कौल और मां सरोज ढौंडियाल ने उनका शौर्य चक्र रिसीव किया। दरअसल, आतंकवादियों के खिलाफ एक ऑपरेशन में उनकी भूमिका के लिए उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। शहीद मेजर ढोंडियाल ने एनकाउंटर के दौरान पांच आतंकवादियों को मार गिराया गया था और 200 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी। उन्होंने फरवरी 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में अपनी जान गंवा दी थी।

अपने शहीद पति मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल के नक्शेकदम पर चलते हुए 29 मई को पत्नी नितिका कौल ने भी सेना की वर्दी पहन ली थी। देश की खातिर मेजर विभूति शंकर पत्नी नितिका कौल को ऐसे वक्त में छोड़कर चले गए थे, जब उनकी शादी के एक साल भी पूरे नहीं हुए थे। हालांकि, करीब छह महीने बाद 29 मई को ओटीए, चेन्नई में कड़ी ट्रेनिंग के बाद वह इंडियन आर्मी में लेफ्टिनेंट बन गई। शनिवार को ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में आयोजित पासिंग आउट परेड के बाद लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी ने उनके कंधे पर सितारे लगाकर उनको बधाई दी। लेफ्टिनेंट निकिता ने पिछले साल इलाहाबाद में वूमेन एंट्री स्कीम की परीक्षा पास की थी।

बता दें कि कश्मीर के पुलवामा में 8 फरवरी 2019 में आतंकियों से लोहा लेते हुए देहरादून निवासी मेजर विभूति ढौंडियाल शहीद हो गए थे। इसके बाद निकिता ने पति के नक्शे कदम पर चलते देश सेवा करने की ठान ली। पिछले साल इलाहाबाद में वूमेन एंट्री स्कीम की परीक्षा पास करने के बाद चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी से ट्रेनिंग ली। शनिवार को निकिता लेफ्टिनेंट बनने के बाद वह अपने शहीद पती के नक्शे कदमों पर चल देश की सेवा करने में जुट जाएंगी। सूत्रों की मानें तो कोरोना के हालात सामान्य होने पर वह उत्तराखंड की राजधानी देहरादून आएंगी।

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