50 बेड वाले अस्पताल सीईए एक्ट से होंगे मुक्त

लखनऊ: प्रदेश में 50 बेड तक के निजी अस्पतालों को क्लीनिकल स्टैब्लिशमेंट एक्ट (सीईए) से मुक्त किए जाने का आश्वासन मिला है। यह जानकारी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को पत्रकार वार्ता में दी। आईएमए यूपी स्टेट की कार्यकारिणी से जुड़े पदाधिकारियों ने बताया कि उन लोगों की कार्यवाहक प्रमुख सचिव स्वास्य सुरेश चंद्रा से वार्ता हुई। वार्ता के बाद ही प्रमुख सचिव ने उन लोगों को कहा है कि प्रदेश में सीईए से जुड़ी आईएमए की कुछ मांगों को पूरा करने पर विचार किया जाएगा।

प्रमुख सचिव से की वार्ता आईएमए यूपी के प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष डा. एएम खान, प्रदेश सचिव डा. जयंत शर्मा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा. शरद अग्रवाल, क्लीनिकल स्टैब्लिशमेंट एक्ट कमेटी के अध्यक्ष डॉ. अमिताभ श्रीवास्तव, संयुक्त सचिव डा. आलोक कुलश्रेष्ठ ने शुक्रवार को कार्यवाहक प्रमुख सचिव स्वास्य विभाग के साथ बैठक की। साथ में नसिर्ंग होम एसोसिएशन के डा. मक्कड़ आदि भी शामिल रहे। शासन में हुई बैठक के बाद रिवर बैंक कॉलोनी स्थित आईएमए भवन में इन डॉक्टरों ने प्रेस वार्ता की। पदाधिकारियों ने बताया कि प्रमुख सचिव से सीईए से जुड़ी मांगों पर स्वस्थ र्चचा हुई। उन्होंने कई मांगों को पूरा किए जाने का आश्वासन दिया है। इसके लिए वह शीर्ष अधिकारियों और मुख्यमंत्री स्तर पर वार्ता करेंगे।

इसमें 50 बेड अस्पताल को सीईए से मुक्त रखने के अलावा फायर पुलिस के उत्पीड़न से मुक्ति करने की मांग प्रमुख रही। इसमें 15 मीटर से कम की इमारत में बने अस्पताल, नसिर्ंग होम में एनओसी के लिए परेशानी न पैदा करने की मांग की। बॉयो मेडिकल वेस्ट निस्तारण के नियमों में भी शिथिलता बरतने की मांग हुई। डा. जयंत शर्मा ने बताया कि भारत सरकार की ओर से बनाए गए क्लीनिकल स्टैब्लिशमेंट एक्ट में कुछ कमियां हैं, जिसे सीधे तौर पर लागू करने से डाक्टरों की परेशानी तो बढ़ेगी। साथ ही आम मरीज पर इसका बहुत ज्यादा असर पड़ेगा। एक्ट के बिना संशोधन या छूट के लागू करने से एक सिजेरियन की कीमत एक लाख पए से टैक्स समेत ऊपर चली जाएगी, जिससे मरीज की जेब पर बोझ बढ़ाएगा। ऐसे ही एक जनरल बेड की कीमत पांच हजार पए से अधिक हो जाएगी।

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