कांग्रेस मुक्त भारत के नारे के बीच तीन साल में 6 लाख करोड़ डूब गए

दिल्ली ब्यूरो :  बीजेपी ने कांग्रेस मुक्त भारत  का नारा लगाया और देखते-देखते कांग्रेस देश के तमाम राज्यों से खारिज होती चली गयी। कांग्रेस के पास अब 2-4 राज्य ही बचे हैं, जहां बीजेपी दाव लगाकर उसे पैदल कर देना चाहती है। संभव है ऐसा हो भी जाए। संभव यह भी है कि कांग्रेस फिर नए तरीके से अपनी तैयारी करे और खोये हुए जनाधार को फिर से पा ले। लेकिन यह सब इतना आसान भी नहीं है।
बीजेपी को ही यह सब पाने में लंबा समय लगा। लेकिन असली बात तो यह है कि अगर भारत कांग्रेस मुक्त हो भी जाय तो आम आदमी को इससे मिलने जा रहा है। पहले कांग्रेस पुरे देश को चारागाह बना राखी थी अब बीजेपी का चारागाह होगा। जनता के हिस्से में तब भी कुछ नहीं था और अभी भी कुछ नहीं आया है। कांग्रेस राज में भी घोटाले होते थे अब बीजेपी के राज में भी घोटाले कि कहानी मिल रही है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि बीजेपी के  बीजेपी के राज  बैंक लूट की कहानी कुछ ज्यादा ही होने लगी है।
आलम यह है कि  भारतीय बैंकों की स्तिथि दिन-प्रतिदिन ख़राब होती जा रही है। पिछले तीन सालों में स्थिति ज़्यादा ख़राब हुई है। इस बात को अब मोदी सरकार ने भी मान लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष बिबेक देबरॉय ने माना है कि पिछले तीन सालों में भारतीय बैंकों ने 6 लाख करोड़ रुपये राईट ऑफ़ किये हैं यानि कर्ज़ का वो पैसा जो डूब गया है। बिबेक देबरॉय ने कहा कि मेरे अनुमान से अभी लगभग 3 लाख करोड़ रुपये और डूबेंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय बैंकों ने जितना लोन दे रखा है उसका 30 फीसदी  कभी वापस नहीं आएगा।
गौरतलब है कि पिछले तीन सालों में भारतीय बैंकों का एनपीए (बैंकों का वो कर्ज़ जिसके वापस आने कि सम्भावना ना हो) 2.40 लाख करोड़ से बढ़कर लगभग 10 लाख करोड़ हो गया है। विश्व में सबसे ज़्यादा एनपीए वाले 39 देशों में भारत 5वें नंबर पर आता है। बैंकों के एनपीए का इस तरह बढ़ना उद्योगपतियों द्वारा लोन ना चुकाना और बैंक घोटालों का नतीजा है।
इन एनपीए में 70 फीसदी  से ज़्यादा हिस्सा उद्योगपतियों का ही है| बता दें, कि पिछले पांच सालों में बैंक घोटाले बहुत ज़्यादा बढ़ गए हैं। 2012-13 से 2016-17 के दौरान देश में 8,670 बैंक घोटाले हो चुके हैं। जहाँ 2012-13 में बैंक घोटालों से बैंकों को सालाना 6300 करोड़ का नुकसान हो रहा था। वहीं अब 2016-17 में ये आकड़ा 17,600 करोड़ हो गया है।
अब जब यह बयान सरकार के अधिकारी ही दे रहे हैं तब किसी कि गवाही कि जरुरत नहीं रह जाती। खेल यह चल रहा है कि जो हो रहा है उसे होने दिया जाय ,कोई कुछ बोले नहीं। जो बोले वह सरकार और पार्टी का दुश्मन। कहा जा रहा है कि नोटबंदी के दैरान बड़े पैमाने पर लुट कि कहानी बनायी गयी थी।
संभव हो कि पीएम मोदी भले मन से नोटबंदी कि कथा रची हो लेकिन चालाक और बेईमान नौकरशाह ,नेता और दलाल को भला पीएम कि मंशा से क्या लेना देना। ऐसे में तो यही कहा जा सकता है कि बीजेपी सरकार सिर्फ सत्ता पाने कि राजनीति करती दिख रही है ,देश कि आर्थिक हालात पर उसकी नजरें ना के बराबर ही रही है। ये बैंक घोटाले और एनपीए भारत कि तमाम आर्थिक समृधि में किसी बड़े सेंध से कम नहीं।
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