72,000 करोड़ के सिंचाई घोटाले में 4 नए मामले दर्ज

नागपुर: उत्तर प्रदेश में 72 हजार करोड़ रुपये के कथित सिंचाई घोटाले में संलिप्त सरकारी अधिकारियों और ठेकेदारों समेत दो दर्जन लोगों के खिलाफ मंगलवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने चार नई प्रथम जांच रिपोर्ट (एफआरआई) दर्ज की। एसीबी नागपुर रेंज के एसीबी निरीक्षक पी.आर. पाटिल ने एक बयान में बताया कि एफआईआर सदर थाने में दर्ज की गई है।

वर्ष 2009 में प्रदेश में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की सरकार के दौरान हुए घोटाले में एफआईआर प्रदेश के दूसरे राजधानी में यहां दोपहर उस समय दर्ज की गई, जब दोनों पार्टियों के नेता सरकार विरोधी प्रदर्शन में शामिल थीं।

उस समय राकांपा के वरिष्ठ नेता अजित पवार और सुनील टटकरे सिंचाई विभाग संभाल रहे थे। ये एफआईआर विदर्भ इलाके में 38 सिंचाई परियोजनाओं की लागत में चौंकाने वाली बढ़ोतरी से संबद्ध है जोकि 6,672 करोड़ से बढ़कर 26,722 करोड़ हो गई थी। ये परियोजनाएं विदर्भ सिंचाई विकास निगम के अधीन के तहत थीं।

परियोजना की लागत में 300 गुना से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी और अतिरिक्त खर्च को 2009 की तीसरी तिमाही में महज तीन महीने में मंजूरी प्रदान की गई थी। परियोजना लागत में बढ़ोतरी में जल्दबाजी से कुल अनुमानित लागत 72 हजार करोड़ रुपये होने के बावजूद परियोजना में अब तक महज आंशिक काम हो पाया है।

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