चारा घोटाला में नए आरोपी बने कई टॉप ब्यूरोक्रेट समेत सीबीआई के अतिरिक्त एसपी भी 

दिल्ली ब्यूरो : रांची सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह के घेरे में अब कई टॉप ब्यूरोक्रेट भी आ गए हैं। चारा घोटाले के कांड संख्या आरसी 38ए/96 में बिहार के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, बिहार व झारखंड के सेवानिवृत्त मुख्य सचिव वीएस दुबे, बिहार के सेवानिवृत्त डीजी विजिलेंस डीपी अोझा व सीबीआइ के एडिशनल एसपी एके झा को नोटिस जारी किया गया है। यह पहला मामला है कि मामले की जांच कर रहे वरिष्ठ सीबीआई अधिकारी एके झा भी आरोपी बनाए गए हैं। इन सभी को 28 मार्च को रांची सीबीआई अदालत में पेश होने को कहा गया है।
आरोपियों की इस नयी सूचि के बाद चारा घोटाला में नया मोड़ आ गया है। माना जा रहा है इन सभी आरोपियों ने मिल जुलकर मामले को अंजाम दिया था। इस घटना के बाद बिहार की राजनीति बदलती जा रही है। विपक्ष अब नीतीश सरकार पर पहले से ज्यादा हमलावर हो गया है।  इनके अलावा सप्लायर दीपेश चांडक, शिव कुमार पटवारी अौर  फूल झा को भी सीबीआई अदालत ने नोटिस भेजा है।
बता दें कि इन सभी पर चारा घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। सभी सात लोगों के खिलाफ धारा 319 के तहत नोटिस जारी किया गया है।सीबीआइ के एडिशनल एसपी एके झा चारा घोटाले में राजनीतिज्ञों से जुड़े सबसे बड़े मामले आरसी 20ए/96 के जांच अधिकारी रहे हैं।  चारा घोटाले में पहली बार किसी सीबीआइ अधिकारी को आरोपी बनाने के लिए नोटिस जारी किया गया है। इस नोटिस के बाद सीबीआई फिर से बदनाम होती नजर आ रही है।
सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश की अदालत ने बिहार के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह पर भी घोटालेबाजों के साथ मिले होने का आरोप लगाया है।  उन पर घोटालेबाजों के खिलाफ कार्रवाई करने में देर करने आरोप लगाया गया है।  चारा घोटाले की अवधि में अंजनी कुमार सिंह दुमका में उपायुक्त के पद पर पदस्थापित थे और अभी बिहार सरकार के मुख्य सचिव हैं। विपक्ष उनपर पद से हटने का दबाब बना रही है
बिहार के तत्कालीन वित्त सचिव वीएस दुबे व तत्कालीन डीजी विजिलेंस डीपी अोझा के खिलाफ भी चारा घोटाले में देर से कार्रवाई करने का आरोप लगाया गया है।एके झा पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने कांड संख्या आरसी 20 में जो दस्तावेज जब्त किये थे, उसके हिसाब से डीपी अोझा के खिलाफ भी अभियोजन स्वीकृति ली जानी चाहिए थी।  लेकिन वह डीपी अोझा के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति लेने में असफल रहे।
दीपेश चांडक चारा घोटाले के बड़े सप्लायर के रूप में चिह्नित हैं।  इसलिए कोर्ट ने उसे भी इस मामले में नोटिस जारी किया है।  शिवकुमार पटवारी भी चारा घोटाला में सप्लायर हैं।  सीबीआइ ने कांड सं आरसी 38ए/96 मामले में उसे गवाह बनाया है।  फूल झा के खिलाफ आरोप लगाया गया है कि उसने कोर्ट में गलतबयानी की।
गौरतलब है कि  1995-96 में दुमका कोषागार से कुल तीन करोड़ 13 लाख रुपये की अवैध निकासी की गयी थी।  सुप्रीम कोर्ट ने 19 मार्च 1996  चारा घोटाले की जांच सीबीआइ से कराने का आदेश दिया था।  इस आदेश के आलोक में सीबीआइ ने दुमका कोषागार से हुई निकासी के मामले में भी प्राथमिकी दर्ज की थी।  इससे पहले दुमका जिला प्रशासन ने भी एफआइआर दर्ज करायी थी।  वर्ष 2000  में 48 आरोपियों के खिलाफ सीबीआइ ने चार्जशीट दायर किया था।  2005 में  मामले में चार्जफ्रेम किया गया।
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