बेल्जियम में बच्चों को भी है इच्छा मृत्यु का अधिकार

सिटी ब्रूसेल्स: बेल्जियम में किसी भी उम्र के नागरिक इच्छा मृत्यु का फैसला लेने का अधिकार है। यहा किसी लाइलाज और कष्टप्रद बीमारी से पीड़ित बच्चों को भी इच्छा मृत्यु का अधिकार है। शर्त है कि बीमारी से पीड़ित बच्चों के मामले में उसके मां बाप की सहमति जरूरी है। इच्छा मृत्यु में उम्र की बाध्यता खत्म करने का कानून बेल्जियम की संसद ने सन 2014 में पास किया था। हालांकि इच्छा मृत्यु का कानून इस देश में सन 2002 में ही पास हो चुका था। सन 2016 में वहां पहली बार एक किशोर ने इच्छामृत्यु मांगी। उसकी उम्र 17 साल थी। वह मरणासन्न था। इस किशोर की कोई डिटेल जारी नहीं की गई। नीदरलैंड्स में अति पीड़ा और लाइलाज बीमारियों से पीड़ित बच्चों तक को यह सुविधा हासिल है।

वर्ष 2014 में पास हुए बिल के मुताबिक 18 साल के कम उम्र का कोई भी बच्चा “जिसे लगातार और असहनीय शारीरिक पीड़ा है, जिसे कम नहीं किया जा सकता और जो पीड़ा किसी गंभीर लाइलाज बीमारी के कारण हो रही है”, वह अगर अपनी मृत्यु की मांग करता है, तो उसकी इच्छा पूरी की जा सकेगी। कानून में कहा गया कि एक मनोचिकित्सक तय करेगा कि मरीज अपना जीवन खत्म का फैसला स्वतंत्र रूप से लेने के लिए तैयार है या नहीं। फैसले को अंतिम रूप देने के लिए माता पिता की सहमति जरूरी होगी।

हालांकि बेल्जियम में भी यह बिल आसानी से पास नहीं हुआ था। इसको लेकर लोगों में भारी गुस्सा था। जब यह बिल पास हुआ तब भारी भीड़ संसद के बाहर विरोध में प्रदर्शन कर रही थी, उसमें बच्चे भी थे। बहुत से लोगों ने सवाल किया कि क्या बच्चों में इतना बड़ा फैसला लेने की क्षमता होती है। बेल्जियम में 2012 के दौरान 1,432 इच्छा मृत्यु के मामले सामने आए हुए, जो 2011 के मुकाबले 25 फीसदी ज्यादा है। यह सभी मौतों का दो प्रतिशत था। वहीं नीदरलैंड्स में पिछले 10 साल में किशोर यूथेनेशिया के पांच ही मामले सामने आए।

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