बेटियां बनीं सिरमौर, चीन में लगाएंगी दौड़

कहते हैं, अगर प्रतिभा और लगन हो तो कोई भी कमी आपके कदम नहीं रोक सकती। यह साबित कर दिखाया है प्रतापगढ़ की खुशबू ने। पिता राम आसरे गुप्ता फुटपाथ पर जूते बेचते हैं। घर की माली हालत भी कुछ ठीक नहीं है, लेकिन राम आसरे के आठ बच्चों की पांचवें नंबर की बेटी खुशबू ने नेशनल क्रासकंट्री चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि क्षेत्र का नाम रोशन किया है। खुशबू अब चीन में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाएगी।
शुरू से ही प्रतिभा की धनी रही है खुशबू
गोवा में रविवार को हुई राष्ट्रीय क्रासकंट्री चैंपियनशिप में खुशबू ने अंडर-20 की 6 किलोमीटर दौड़ 22 मिनट 12 सेकेंड में पूरी कर कांस्य पदक जीता। इससे पहले खुशबू ने विजयवाड़ा में हुई जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में स्टीपलचेज में नए राष्ट्रीय रिकार्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता था। खुशबू के लाजवाब प्रदर्शन के चलते उसे एसएसबी में सिपाही की नौकरी भी मिल गई है। खुशबू के माता-पिता भी उसकी इस सफलता से खासे उत्साहित हैं। वह भी मानते हैं कि उनकी लाडली बिटिया उनके घर की गरीबी दूर करके नाम रोशन करेगी।
किसान की बेटी भी चीन में लगाएगी दौड़
खुशबू की ही तरह कविता यादव ने भी अपने माता-पिता का नाम रोशन किया है। कविता भी चीन में भारत की तरफ से दौड़ लगाएगी। गोवा में हुई नेशनल क्रासकंट्री चैंपियनशिप में कविता ने 21 मिनट 32 सेकेंड में दौड़ पूरी कर अंडर-20 में सिल्वर मेडल जीता है। कविता ने भी इससे पहले विजयवाड़ा में हुई जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में एक स्वर्ण व एक कांस्य पदक जीतकर सुॢखयों बटोरी थीं। तीन बहनों व एक भाई में दूसरे नम्बर की बाराबंकी की रहने वाली कविता के पिता राजसरन यादव पेशे से किसान हैं, जबकि मां देवी यादव घर संभालते हुए खेती में भी हात बंटाती हैं। कविता ने शौकिया तौर पर पहले खेत की मेड़ों पर दौड़ लगाई और फिर अपनी मेहनत के बल पर लखनऊ हॉस्टल में जगह बनाई। इसके बाद से इस होनहार बिटिया ने कभी पीछे पलटकर नहीं देखा।

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