तेजी से बढ़ता डिजिटल मीडिया, विज्ञापन में भी सबको पछाड़ रहा

अखिलेश अखिल 

भारत में मीडिया और मनोरंजन उद्योग तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। वैसे माना जा रहा है कि पिछले 3 साल से इन उद्योग में भारी गिरावट आयी है और लाखों लोगों को बेकारी का सामना करना पड़ा है लेकिन पिछले सालों के रिकॉर्ड को देखने से पता चलता है कि  यह क्षेत्र आने वाले समय में रोजगार और लाभ का बड़ा जरिया साबित होगा। मीडिया के क्षेत्र में डिजिटल मीडिया सबसे तेजी से आगे बढ़ रहा है और विज्ञापन पर भी इसकी भरी पकड़ होती जा रही है।

भारत के मीडिया एवं मनोरंजन  क्षेत्र का कारोबार वर्ष 2016 के मुकाबले 13 प्रतिशत बढ़कर 2017 में 1.5 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है। सलाहकार फर्म अर्न्‍स्‍ट ऐंड यंग  इंडिया द्वारा कराए गए एक अध्ययन में कहा गया है कि लगभग 11.6 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी के साथ वर्ष 2020 तक यह कारोबार 2 लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा। इस तेजी का एक प्रमुख कारण डिजिटल क्षेत्र है, जहां बढ़ते कंटेंट उपभोग के कारण कंपनियों को विज्ञापन बजट में आवश्यक बदलाव करने पड़े।

अध्ययन का मानना है कि एमऐंडई क्षेत्र की वृद्धि दर भारत की जीडीपी वृद्धि दर से अधिक रहेगी। इसके अनुसार 2017 में सबस्क्रिप्शन में बढ़ोतरी ने विज्ञापन क्षेत्र को पीछे छोड़ दिया है लेकिन 2020 तक डिजिटल क्षेत्र की सहायता से विज्ञापन क्षेत्र लगातार बढ़ता रहेगा। अर्न्‍स्‍ट एंड यंग इंडिया में सहयोगी एवं एमएंडई लीडर फारूख बलसारा कहते हैं, ‘डिजिटल क्षेत्र के बल पर 2017 में भारत का एमएंडई क्षेत्र 1.5 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। 2020 तक 2 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचने के बाद क्या डिजिटल क्षेत्र का एमएंडई अपने उच्च स्तर पर होगा?’ वह सलाह देते हैं कि हमें अपने एमएंडई क्षेत्र के प्रारूप पर दोबारा विचार करने की आवश्यकता है।

अर्न्‍स्‍ट ऐंड यंग इंडिया में सहयोगी एवं एमऐंडई सलाहकार आशीष फेरवानी कहते हैं, ‘2017 की वृद्धि में सबसे अधिक योगदान डिजिटल, फिल्म, एनिमेशन और दृश्य प्रभाव (वीएफएक्स) क्षेत्र का रहा।’ पिछले कुछ वर्ष से डिजिटल मीडिया तेजी से बढ़ रहा है और विज्ञापन के बढ़ते चार्ट में सबसे ऊपर बना हुआ है। सबस्क्रिप्शन से मिलने वाला राजस्व भी तेजी से बढ़ रहा है और 2020 तक वह अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराएगा। वर्ष 2017 में डिजिटल मीडिया में 29.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जो वस्तु एवं सेवा कर के बाद 27.8 प्रतिशत रही।  वहीं, विज्ञापन के क्षेत्र में 28.8 प्रतिशत और सबस्क्रिप्शन में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

वर्ष 2016 में डिजिटल क्षेत्र से मिले कुल राजस्व का केवल 3.3 प्रतिशत सबस्क्रिप्शन से आया था। 2020 तक इसके 9 प्रतिशत की दर से बढऩे की संभावना है। 2017 में लगभग 250 अरब वीडियो ऑलनाइन देखी गईं और 2020 तक इसके दोगुना होने की संभावना है। 2015 में कुल मोबाइल ट्रैफिक का 40 प्रतिशत वीडियो सेवाओं से आया था। 2020 तक यह बढ़कर 72 प्रतिशत तक हो सकता है।

टीवी उद्योग 2016 के 59.4 हजार करोड़ रुपये के मुकाबले 11.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ वर्ष 2017 में 66 हजार करोड़ रुपये पर पहुंच गया। हालांकि सभी करों के बाद सकल वृद्धि 9.8 प्रतिशत रही। इसमें विज्ञापन से प्राप्त राजस्व बढ़कर 26.7 हजार करोड़ रुपये हो गया, जबकि वितरण क्षेत्र से मिला राजस्व 39.3 हजार करोड़ रुपये रहा। हालांकि प्रसारण के स्तर पर सबस्क्रिप्शन  से मिला राजस्व (अंतरराष्ट्रीय सबस्क्रिप्शन सहित) कुल राजस्व का 28 प्रतिशत रहा। विज्ञापन कुल राजस्व का 41 प्रतिशत रहा। रिपोर्ट का अनुमान है कि टेलीविजन उद्योग में विज्ञापन से राजस्व की हिस्सेदारी 2020 तक बढ़कर 43 प्रतिशत हो जाएगी।

2017 में केवल 3 प्रतिशत की वृद्धि के बावजूद प्रिंट दूसरे पायदान पर रहा। इसका कुल राजस्व 30.3 हजार करोड़ रुपये रहा। 2020 तक इसमें लगभग सात प्रतिशत सालाना वृद्धि की संभावना है। हालांकि गैर अंग्रेजी क्षेत्र में 8-9 प्रतिशत सालाना की बढ़ोतरी होगी, लेकिन अंग्रेजी भाषा के क्षेत्र की वृद्धि दर थोड़ी कर रहेगी। ऐसा अनुमान है कि इस क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की वर्तमान 26 प्रतिशत की सीमा में कोई बदलाव नहीं होने से विदेशी निवेश प्रभावित हो रहा है। इस क्षेत्र में पत्रिकाओं का योगदान 4.3 प्रतिशत रहा।

2017 में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय फिल्म बाजार 27 प्रतिशत की तेजी से बढ़ा। इसमें सैटेलाइट और डिजिटल अधिकारों की बिक्री भी शामिल रही। होम वीडियो क्षेत्र को छोड़कर अन्य सभी सहयोगी क्षेत्रों में बढ़ोतरी हुई और 2017 में फिल्म क्षेत्र का राजस्व 15.6 हजार करोड़ रुपये रहा। हालांकि हॉलीवुड और अंतरराष्ट्रीय फिल्मों ने चीजों को संभाला।

कुल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन में शीर्ष 50 फिल्मों का योगदान 97.75 प्रतिशत रहा। 2017 में शीर्ष 50 फिल्मों का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 11.60 प्रतिशत की दर से बढ़ा। क्षेत्रीय फिल्मों के रिलीज होने की संख्या भी 2017 में बढ़ी। स्क्रीन संख्या 2016 के 9,481 स्क्रीन के मुकाबले 2017 में बढ़कर 9,530 स्क्रीन हो गई। 2017 में हिंदी फिल्मों ने 1 अरब रुपये का अंकड़ा पार किया जो पिछले 5 वर्ष में सबसे अधिक था। साथ ही, हिंदी भाषा में डब की गई फिल्मों की संख्या 2016 (31 फिल्म) के मुकाबले 2017 में 3 गुना बढ़कर 96 हो गई।

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