विकास दुबे के भाई दीपू के बारे में पुलिस को मिले अहम सुराग, 3 दिन में 4 लेटर भेज चुका है घर

कानपुर: कानपुर बिकरू कांड के मुख्य आरोपी व हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे का भाई दीप प्रकाश उर्फ दीपू लखनऊ अथवा आस-पास ही कहीं छिपा हुआ है। वह अपने घर पर तीन दिन में चार चिठ्ठियां भेज चुका है। इसमें लिखा है कि वह सकुशल है और जल्दी ही कोर्ट में हाजिर हो जायेगा। यह चिठ्ठी लखनऊ से ही पोस्ट की गई है। यह खबर मिलते ही एसटीएफ की एक टीम रविवार को कृष्णानगर स्थित दीप प्रकाश के घर पहुंची और उसकी पत्नी से पूछताछ की। दीप के खिलाफ कृष्णानगर कोतवाली में सरकारी गाड़ी नीलामी में लेने वाले को धमका कर गाड़ी ले जाने का मुकदमा दर्ज है। इसमें कृष्णानगर पुलिस उसे वान्टेड घोषित कर चुकी है।

दीपू घटना के बाद बिकरू से भागा था
बिकरू के आसपास के एक दर्जन गांव, कानपुर देहात, औरैया, मध्य प्रदेश के कुछ शहरों, झांसी, नोएडा, फरीदाबाद आदि शहरों में सर्च ऑपरेशन चलाया मगर पता नहीं लग सका है। दीपू घटना के बाद बिकरू से भागा था उस दौरान उसके पास दो मोबाइल नम्बर थे। पुलिस ने इन नम्बरों को सर्विलांस पर लिया है मगर दोनों स्विच ऑफ है और उनकी आखिरी लोकेशन शिवली में मिली थी। दीपू की तलाश में आधा दर्जन रिश्तेदारों के यहां छापेमारी की गई मगर पता नहीं चल सका। एसटीएफ को जानकारी मिली है कि दीपू दुबे कोर्ट में सरेंडर करने की फिराक में है। इसके लिए कुछ लोग उसकी मदद कर रहे हैं। उन लोगों ने मोबाइल नम्बर भी एसटीएफ के हाथ लगे हैं।

ये थे शामिल :

बिकरू गांव आठ पुलिस कर्मियों की हत्या के बाद एफआईआर में विकास दुबे के अलावा अमर दुबे, अतुल दुबे, प्रेम कुमार, प्रभात मिश्रा, बउवा, हीरू, शिवम, जिलेदार, राम सिंह, उमेश चन्द्र, गोपाल सैनी, अखिलेश मिश्रा, विपुल, श्यामू बाजपेई, राजेन्द्र मिश्रा, बाल गोविंद, दयाशंकर अग्निहोत्री, दीपू शामिल थे। जिसमें अब तक पुलिस विकास दुबे, अमर, अतुल, प्रेम कुमार, प्रभात और बउआ को मुठभेड़ में मार गिराया है। जो बचे हुए अपराधी है उनकी तलाश में एसटीएफ लगी है। एक दर्जन लोगों को उठाकर पूछताछ की मगर उनसे कुछ नहीं मिला। सात लोगों को फिलहाल छोड़ दिया गया है।

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