केंद्रीय गृह मंत्रालय की समिति में प्रो. बलराज चौहान, जानिए क्यों मिली नियुक्ति

लखनऊ: देश के आपराधिक कानूनों में सुधार करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2 मार्च, 2020 को दिल्ली की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के वाइस चॉन्सलर प्रोफेसर डॉ. रणबीर सिंह की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया था। इस समिति में डॉ. रणबीर सिंह के अलावा नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के ही जीएस बाजपेयी और डॉ. मृणाल सतीश के अलावा वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी व पूर्व जिला जज जीपी थरेजा को सदस्य नियुक्त किया गया था। लेकिन डॉ. मृणाल सतीश के समिति में शामिल होने से मना करने पर धर्मशाला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. बलराज चौहान को सदस्य 27 मई को सदस्य नियुक्त किया गया।

प्रोफेसर बलराज चौहान एमिटी यूनिवॢसटी, लखनऊ कैंपस के लॉ स्कूल के निदेशक भी रहे हैं। इसके अलावा वह डॉ. राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, लखनऊ और एनएलआईयू भोपाल के कुलपति के रूप में कार्य कर चुके हैं। वह उत्तर प्रदेश राज्य कानून आयोग, यूपी राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के सदस्य और कार्यकारी सदस्य शास्त्री इंडो कैंडियन इंस्टीट्यूट नई दिल्ली के सदस्य भी रहे हैं। उनकी विशेष रुचि आपराधिक कानून, अपराध विज्ञान और नैदानिक कानूनी शिक्षा के क्षेत्र में है। यही वजह है कि प्रो. चौहान को वर्ष 2009 में क्रिमिनोलॉजी के क्षेत्र में योगदान के लिए डॉ. कुमारप्पा रेकलेस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वह नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिमिनोलॉजी और फोरेंसिक साइंस और ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट, गृह मंत्रालय, नई दिल्ली के साथ जुड़े रहे हैं। इसके अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, इटली, युगांडा और फिलीपींस, कनाडा में विभिन्न विश्वविद्यालयों का शैक्षणिक भ्रमण कर चुके हैं।

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