सुलग रहा है ईरान, हिजाब पर हो रहा बवाल

नई दिल्ली : ईरान में इन दिनों एक अलग ही तरह का माहौल बना हुआ है। समूचे विश्व की शिया-सुन्नी मुस्लिम महिलाओं के लिए 1969 में जिन खोमैनी ने हिजाब या नकाब के लिए पाबंदी लगाई थी, उसी ईरान अब हिजाब के खिलाफ विद्रोह हो गया है। वह ईरान जिसने शाह राजवंश के खिलाफ इस्लामिक धर्मगुरु खोमैनी को अपना सर्वोच्च नेता स्वीकार किया था उसी ईरान में आज चार दशक के भीतर ही खोमैनी मुर्दाबाद के नारे लग रहे हैं। महिलाएं सड़कों पर निकल कर इस्लामिक शासन का विरोध कर रही हैं और अब पुरुषों ने भी उनका साथ देना शुरू कर दिया है।

युवतियों ने हिजाब पहनने से किया इनकार
नवयुवतियों हिजाब को गुलामी का प्रतीक मानते हुए इसे पहनने से साफ मना कर दिया है। इन युवतियों का तर्क है कि हिजाब उनके लिए कफन के समान है। हालांकि इनका विरोधी करीब तीन सालों से चल रहा है, लेकिन पिछले कुछ महीने से यह कुछ ज्यादा ही मुखर हो गया है। महिलाओं ने सार्वजनिक स्थलों पर बिना हिजाब जाना तक शुरू कर दिया है। इन महिलाओं पर कार्रवाई करते हुए बिना हिजाब के घर से निकलने वाली महिलाओं की गिरफ्तारी ने लोगों का गुस्सा और बढ़ा दिया है। यही वजह है कि हिजाब के विरोध में अब न केवल महिलाएं, बल्कि पुरुष भी मैदान में उतर आए हैं। सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि पुलिस ने भी अब कार्रवाई करने से मना कर दिया है।


हिजाब के विरोध में हिंसा
हिजाब का विरोध अब तेजी से फैल रहा है। पिछले दिनों से ईरान के लगभग सभी शहरों में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। इतना ही नहीं, कुछ जगहों पर तो हिंसा की भी घटनाएं हुई हैं। प्रदर्शनकारी ईरान शासन के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
अमेरिका भी खुलकर आया मैदान में

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ईरान में हिजाब के आंदोलन ने अमेरिका को भी संजीवनी दे दी है। अमेरिका भी हिजाब का विरोध करने वालों के सात खड़ा दिख रहा है। अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी है कि वह अपने नागरिकों के मानवाधिकारों की अनदेखी न करे, क्योंकि दुनिया सबकुछ देख रही है। इसके पीछे कारण यह है कि चार दशक पहले इसी ईरान में ‘डेथ टू अमेरिका’ के नारे लगे थे। ईरान के आखिरी राजा अहमद रजा शाह पहलवी पर अमेरिका समर्थक होने का आरोप लगा था। बाद में रजा शाह को देश छोड़कर भागना पड़ा था। आज अमेरिका कहीं न कहीं उसी बात का बदला ले रहा है।

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