ईरानी बिरयानी में बासमती का तड़का

अलीगढ़ के बासमती चावल की खुशबू का कोई जवाब नहीं। इसने अपनी इसी खासियत से ईरानियों को अपना मुरीद बना लिया है, क्योंकि वे अपनी बिरयानी में अलीगढ़ के बासमती का चावल का ही इस्तेमाल करते हैं। इसका पता चलता है एक दर्जन कंपनियों द्वारा जिले से हर साल करीब 1० लाख कुंतल चावल कई देशों को निर्यात किये जाने से। इस चावल का निर्यात ईरान में सबसे ज्यादा होता है।

इस साल अलीगढ़ में 8० हजार हेक्टेयर में धान की फसल बोई गई। इस वजह से लगभग दो लाख कुंतल धान उत्पादन की संभावना है। पिछले साल यहां धान की फसल का रकबा 79 हजार हेक्टेयर था। अलीगढ़ के अलावा आगरा, मैनपुरी, एटा, हाथरस, कासगंज के किसान यहां बासमती धान बेचने आते हैं। हर साल यहां औसतन 2०-25 लाख कुंतल धान की खरीद होती है। इसमें अलीगढ़ का हिस्सा 8 से 1० लाख कुंतल होता है। सुगंधा, पीटेन, 15०9 व सरबती के अलावा 1121 प्रजातियां विशेष रूप से निर्यात की जाती हैं।

हरियाणा व दिल्ली की कंपनियां धान को प्रोसेस कर अपने ब्रांड से निर्यात करती हैं। सऊदी अरब, बहरीन, कतर, कुवैत, ओमान के अलावा इराक व ईरान को निर्यात में प्राथमिकता दी जाती है। धनीपुर मंडी के व्यापारी किसानों से मांग के अनुसार धान खरीदकर अनुबंधित कंपनियों का टैग लगाकर भेजते हैं।

अलीगढ़ के बासमती का दाना साधारण बासमती की तुलना में लम्बा और पतला होता है। इसे कम पानी में पकाया जाता है। कच्चे चावल में ही खुशबू आती है। बनने के बाद इसकी सुगंध काफी बढ़ जाती है। मंडी के उप निदेशक नरेंद्र कुमार मलिक के अनुसार चावल निर्यात करने वाली कंपनियों में बासमती की विभिन्न प्रजातियों की भारी मांग है। इसी वजह से हर साल लाखों कुंतल धान खरीदा जाता है।

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