निजी अस्पतालों में कोरोना इलाज की तय हो सीमा? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से एक हफ्ते के भीतर मांगा जवाब

नई दिल्ली: निजी अस्पतालों में COVID-19 के इलाज से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। कोर्ट ने इलाज की कीमत को कम करने पर सरकार से जवाब मांगा है। पीआईएल में अस्पतालों में कोविड-19 के इलाज की कीमत एक सीमा तय की जाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि निजी अस्पतालों में कोविड यानी कोरोना वायरस के इलाज की कीमत ज्यादा लग रही है ऐसे में लोग इसका खर्चा नहीं उठा सकते हैं।

कोर्ट ने शुक्रवार को हुई सुनवाई में सरकार से इस मामले पर एक हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से एक हफ्ते में स्वास्थ्य मंत्रालय से जवाब लेने के लिए कहा गया है। इस मामले की सुनवाई एक हफ्ते के बाद होगी। बता दें कि इससे पहले कोरोना मरीजों के महंगे उपचार के आरोपों के बाद निजी अस्पतालों ने अपनी फीस को एक सीमा तक तय कर दी है। अब मरीजों को अनाप-शनाप फीस नहीं देनी पड़ेगी। एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (इंडिया) ने 21 राज्यों के अस्पतालों से चर्चा करने के बाद कोविड उपचार राशि को तय किया है जिसके तहत प्रतिदिन अधिकतम 35 हजार रुपये की फीस शामिल है। कोविड उपचार को चार चरण में बांटते हुए फीस को तय किया है।

अगर कोई मरीज सामान्य वार्ड में भर्ती होता है 15 हजार रुपये से ज्यादा नहीं लिए जा सकेंगे। अगर कोई मरीज ऑक्सीजन के साथ वार्ड में है तो 20 और आइसोलेशन आईसीयू में 25 हजार रुपये अधिकतम शुल्क तय किया है। अगर मरीज आईसोलेशन आईसीयू में है और उसे वेंटिलेटर की स्थिति है तो 35 हजार रुपये अधिकतम फीस तय की है। इनमें इम्युनोग्लोबुलिन, टोसिलिजुमाब, प्लाज्मा थैरेपी जैसी दवाओं का खर्च शामिल नहीं है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अलेक्जेंडर थॉमस ने बताया कि कोविड मरीजों की वृद्घि के अलावा निजी अस्पतालों में उपचार लागत में पारदर्शिता न होने से जुड़ी शिकायतें मिल रही थीं। ऐसे में यह विचार आया है कि कोविड महामारी के इस दौर में अस्पतालों में फीस एक जैसी तय होनी चाहिए। इसीलिए एसोसिएशन से जुड़े देश भर के सभी निजी अस्पतालों के संचालकों की आपसी रजामंदी के बाद फीस का निर्धारण किया गया है।

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