कौशाम्बी में गुरुकुल वैदिक संस्कृत महाविद्यालय को हड़पने की कोशिश, जांच शुरू

कौशाम्बी : सत्तर साल पूर्व सैनी स्थित गुरुकुल वैदिक संस्कृत महाविद्यालय को हड़पने की मंशा का खुलासा हुआ है. फ़र्जी संस्था बनाए जाने का खुलासा होने के साथ अपदस्थ प्रबंधक पर कार्यवाई की तलवार लटक गई है. इससे जालसाजों में हड़कंप मचा हुआ है.

बता दें कि वर्ष 1958 में सैनी में स्थापित किए गए गुरुकुल संस्कृत महाविद्यालय का संचालन आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तर प्रदेश लखनऊ द्वारा किया जा रहा है. इसके संचालन के लिए संस्था वैदिक शिक्षा समिति सिराथू के नाम से 70 वर्ष पूर्व रजिस्टर्ड है. प्रशासक अजय कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि आर्य समाज के इस शिक्षा संस्था पर स्थानीय कतिपय लोगो की निगाह खराब हो गई है. उन लोगों ने 70 साल पूर्व स्थापित संस्था को हड़पने के लिए वर्ष 2002 में गुरुकुल वैदिक संस्कृत महाविद्यालय समिति के नाम से रजिस्ट्रेशन कराकर खेल शुरू कर दिया.

कागजों में हुए इस खेल में तत्कालीन प्रबंधक पंचमलाल मौर्य आदि के शामिल होने से किसी को भनक नही लग सकी. बताते है कि जब अजय कुमार श्रीवास्तव प्रशासक बन कर आए तो यह फर्जीवाड़ा विवाद जांच के दौरान सामने आया.सैनी गुरुकुल महाविद्यालय के प्रशासक ने फर्म सोसायटी से दस्तावेज निकलवाए तो जालसाजी परत-दर-परत खुलकर सामने आ गई. इस फर्जी संस्था में चुनिंदा लोगों को छोड़ कर पुरानी कमेटी के लोगों के नाम शामिल किए गए थे. प्रशासक की शिकायत पर सहायक निबंधक इलाहाबाद ने जांच बैठा दी है.

जांच में तलब किए जाने पर पंचमलाल मौर्य ने फर्जीवाड़ा का ठीकरा रिटायर्ड हुए प्राचार्य श्याम बेदी शुक्ला पर यह कहते हुए मढ़ दिया है कि उन्हें कोई जानकारी ही नही है. जांच के दौरान उन्हें फर्जीवाड़े की जानकारी हुई है. पूर्व प्रबंधक की बातों में कितनी सच्चाई है यह आने वाले समय मे ही साफ हो पाएगा. फिलहाल फर्जीवाड़े में शामिल लोग अपनी गर्दन बचाने के लिए जुगाड़ का रास्ता खोजने में लगे हैं.

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