जानिए IRCTC की साइट हैक कर कैसे उड़ाए जाते थे ई-कन्फर्म टिकट ?

नयी दिल्ली : IRCTC की साइट हैक कर ई-कन्फर्म टिकट और तत्काल टिकट उड़ाने वाले गैंग आंध्र प्रदेश में सक्रिय है. इस गैंग के तार दिल्ली और छत्तीसगढ़ से जुड़े हैं. यह खुलासा नकली सॉफ्टवेयर और डाटा लीक करने के मामले में पकड़े गए प्रोग्रामर ने सीबीआई की पूछताछ में किया है. इसकी पुष्टि रायपुर मंडल की आरपीएफ की अपराध गुप्त शाखा ने की है. बताया जाता है कि इसके साथ ही पकडे गए प्रोग्रामर से कई अन्य बड़े खुलासे भी सामने आने कि उम्मीद है.

साइबर एक्सपर्ट लेते थे गुप्त ट्रेनिंग

सीबीआई सूत्रों के मुताबिक इस मामले कि चल रही जांच में परत-दर-परत चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं. अभी तक प्रदेश में कन्फर्म टिकटों की दलाली का धंधा आंध्र प्रदेश के साइबर एक्सपर्ट के सहारे ही चला करता था. जिसके चलते ये लोग यहां आकर ई-टिकट की दलाली में संलिप्त साइबर एक्सपर्ट को गुप्त रूप से ट्रेनिंग देकर चले जाते थे. जैसे ही साइट को फुलप्रूफ करने की कवायद होती थी, वैसे ही साइट हैकर सक्रिय हो जाया करते थे. फिलहाल स्थानीय साइट हैकरों को चिन्हित करने के लिए आंध्र प्रदेश के संदिग्ध साइबर एक्सपर्ट की सूची बनाई जा रही है. इसके लिए वहां की अपराध गुप्त शाखा की मदद ली जा रही है. इसके साथ ही रायपुर और बिलासपुर मंडल क्षेत्र में आई आरसीटीसी से अनुबंधित कैफे संचालकों से भी इस बाबत पूछताछ चल रही है.

फर्जी आईडी से बनते थे टिकट

सुबह 10 बजे जैसे ही आईआरसीटीसी की साइट खुलती थी, वैसे ही साइट हैकर प्रोग्रामर से मिले डाटा के जरिए तत्काल टिकट उड़ा देते थे. इसके बाद साइबर एक्सपर्ट के सहारे लोगों की फर्जी आईडी से कन्फर्म ई-टिकट बना लेते थे. इस बात का खुलासा होने के बाद से पूर्व में पकड़े गए टिकट दलाल फरार हैं. कई संभावित ठिकानों पर आरपीएफ की अपराध गुप्त शाखा की टीम दबिश दे रही है. कुछ टिकट दलालों से पूछताछ भी की गई. इनसे मिलने वाली हर सूचना सीबीआई की टीम को दी जा रही है.

थोड़े दिन पहले ही हुआ था खुलासा

आपको बता दें कि कुछ समय पहले ही ट्रेनों के लिए तत्कााल टिकट मिलने में हो रही असुविधा के पीछे बड़े घोटाले का खुलासा हुआ था. सॉफ्टवेयर के सहारे तत्काल टिकटों की एक साथ बुकिंग के कारण मिनटों में टिकट खत्म हो जाया करते थे. हैरानी की बात यह है कि यह सॉफ्टवेयर भी सीबीआई के ही असिस्टेंट प्रोग्रामर अजय गर्ग ने बनाया था. सीबीआई के एक अधिकारी ने कहा कि अजय गर्ग के बनाए सॉफ्टवेयर को बुकिंग एजेंटों तक जौनपुर के अनिल कुमार गुप्ता नाम का आदमी पहुंचाता था. एजेंटों को अजय गर्ग के बारे में कोई जानकारी नहीं होती थी.

सालभर से चल रहा था यह खेल

सीबीआई को अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक अजय गर्ग का यह खेल पिछले एक साल से जारी था. सीबीआई अधिकारी के मुताबिक यूपीएससी के मार्फत सीबीआई में आने के पहले अजय गर्ग आईआरसीटीसी में प्रोग्रामर था.साल 2007 से 2011 के बीच आईआरसीटीसी में नौकरी करते हुए उसने उसकी वेबसाइट की खामियों को पहचाना और नया सॉफ्टवेयर बनाकर उसे अपनी कमाई का जरिया बनाने में जुट गया.

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