सुनिए जी ! शिवराज मामा के राज में हर रोज 92 बच्चों की मौत !

दिल्ली ब्यूरो : मध्यप्रदेश में डेढ़ दशक से राज करते शिवराज सिंह चौहान की सरकार कहने के लिए बहुत कुछ कहती है लेकिन दिखाई जो पड़ता है उससे शर्म ही आती है। कहा जा सकता है कि शिवराज की सरकार जुमले पर आधारित है और सूबे का हर आदमी अब उनके जुमले से आजिज है। प्रदेश के लोगों से मामा कहलाने में गर्व महसूस करने वाले शिवराज सिंह के राज में बच्चो की हालत बेहद ख़राब होने की रपट आ रही है। खबर है कि मामा के राज में हर रोज 92 बच्चो की मौत कुपोषण से हो रहे हैं और सरकार के लोग इस खेल में लगे हैं कि इस साल के अंत में होने वाले चुनाव में फिर कैसे बाजी मार लें।
मध्य प्रदेश विधानसभा में स्वयं प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनीस ने एक सवाल के जबाब में जानकारी दी है कि प्रदेश में कुपोषण से रोज मरने वाले बच्चों की संख्या 92 हो गई है। बता दें कि  2016 में यह आंकड़ा 74 था। महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों के आधार पर प्रदेश में जनवरी 2016 से जनवरी 2018 तक करीब 57,000 बच्चों ने कुपोषण के चलते दम तोड़ दिया।  इस बीच, 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2017 के बीच  396 दिनों में 5 वर्ष तक के मृत बच्चों की संख्या 28,948 रही, जबकि 6 से 12 वर्ष के 462 बच्चों की मौत हुई।  इस तरह इस अवधि में कुल 29,410 बच्चों की मौत हुई।  इस तरह औसतन प्रतिदिन 74 बच्चों की मौत हुई।
अप्रैल 2017 से सितंबर 2017 के बीच के 183 दिनों में 1 वर्ष तक के 13,843 बच्चे कुपोषण के चलते काल के गाल में समा गए।  1 से 5 वर्ष के 3,055 बच्चों की मौत हुई।  इस तरह कुल 16,898 बच्चों की मृत्यु हुई।  183 दिन में औसतन प्रतिदिन 92 बच्चों की मृत्यु हुई।
ताजा आंकड़े अक्टूबर 2017 से जनवरी 2018 के बीच के 123 दिनों के हैं।  इस अवधि में 0 से 1 वर्ष तक के मृत बच्चों की संख्या 9,124 थी।  तो वहीं, 1 से 5 वर्ष की उम्र के बीच वाले 2,215 बच्चों की मौत हो गई।  यानी कि कुल 11,339 बच्चों की मृत्यु हुई।  जिसका प्रतिदिन औसत 92 निकलता है।  आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि कुपोषण से लड़ने के मध्य प्रदेश सरकार के दावे इस दौरान खोखले ही साबित हुए हैं।  जहां, 1 जनवरी 2017 तक के आंकड़े बताते हैं कि उस समय तक 70,60,320 बच्चों का प्रदेश में वजन किया गया जिनमें से 56,13,327 बच्चे सामान्य वजन के थे।  12 लाख 84 हजार 36 कम वजन के पाए गए और 1 लाख 62 हजार 957 बच्चे अतिकुपोषित मिले।  कुल 14 लाख 46 हजार 993 बच्चे कुपोषित थे।
तो फरवरी 2017 में वजन किए गए 71,35,036 में से 14,17,800 बच्चे कुपोषित पाए गए।  इस दौरान भले ही संख्या में कमी दर्ज की गई।  लेकिन दिसंबर 2017 में तौले गए 69,84,872 बच्चों में भी 14 लाख के ऊपर कुपोषित बच्चे मिले।
बहरहाल, यहां यह जिक्र करना जरूरी है कि जब सितंबर 2016 में प्रदेश के श्योपुर जिले जिसे ‘भारत का इथोपिया’ भी कहा जाता है, में कुपोषण के चलते  116 बच्चों की मौत हुई थी तो प्रदेश सरकार ने इस संबंध में श्वेत-पत्र लाने की घोषणआ की थी।  लेकिन, प्रदेश की शिवराज सरकार कुपोषण को लेकर कितनी गंभीर है, यह इस बात से पता चलता है कि अब तक इस गंभीर मसले पर श्वेत-पत्र नहीं लाया जा सका है। और अब कहानी ये बनती है कि चाहे राज्य में कुछ भी हो जाए सरकार की नजर तो चुनावी खेल पर टिकी है। फिर नए नए वादे किये जा रहे हैं। लोगों को फासा जा रहा है और शिवराज की सरकार सबसे बेहतर सरकार के नारे लगाए जा रहे हैं।
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