साक्षरता की बेमिसाल ‘अम्मा’

भारत सिंह

पहले तो यही कि 96 साल का जीवन बहुत ही कम लोगों को नसीब होता है और इस उम्र में काश, कोई महिला आंखों की मंद पड़ती रोशनी और कांपते हुए हाथों से पढ़ना-लिखना सीखे, और परीक्षा में 1०० में 98 नम्बर हासिल करे, तो उसकी जितनी प्रशंसा की जाये कम ही है। साक्षरता की अलख जगातीं इस बेमिसाल देवी का नाम है कात्यायिनी अम्मा, जो केरल के अलापुजहा जिले के चेप्पड़ में रहती हैं। 98 प्रतिशत पाने के बावजूद उन्हें इस बात का बेहद अफसोस और दुख है कि कैसे गणित के दो नम्बर के सवाल उनसे गलत हो गये।

कात्यायिनी ने यह परीक्षा इसी साल अगस्त में दी थी। इस परीक्षा का आयोजन केरल सरकार ने कराया था। सरकार ने अच्क्षरलक्षम मिशन के तहत साक्षरता की यह परीक्षा इसलिए आयोजित करायी थी, ताकि उसका राज्य 1०० प्रतिशत साक्षर हो सके। इस परीक्षा में 43,33० परीक्षार्थी बैठे थे। इनमें से 42,933 परीक्षार्थी सफल हुये। परीक्षा तीन भागों में विभाजित थी।

लिखित परीक्षा के लिए 4० अंक, पाठ पाठन के लिए 3० अंक और गणित के लिए 3० अंक निर्धारित थे। विलक्षण कात्यायिनी ने पाठ पाठन और लिखित परीक्षा में शत प्रतिशत अंक हासिल किये। वह गणित में 28 अंक पर अटक गयीं वर्ना 2 अंकों की यह कमी उनकी आंखों में आंसू आने का कारण न बनती। पाठ पाठन और लिखित परीक्षा मलयालम भाषा में ली गयी। परीक्षा परिणाम 31 अक्टूबर को घोषित किया गया।

स्वतंत्रता दिवस पर अच्क्षरलक्षम मिशन को लांच करने वाली कम्युनिस्ट सरकार के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने तिरुवनंतपुरम में 1 नवम्बर को मेरिट में आने वाले बुजुर्गों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। खास बात यह कि उन्होंने प्रमाणपत्र वितरण समारोह का श्रीगणेश कात्यायिनी को सम्मानित करने के साथ किया।

इस अवसर पर मौजू बात यह रही कि जब मुख्यमंत्री ने कात्यायिनी को सर्टिफिकेट और बधाई दी, तो उसी समय किसी ने उनसे कहा कि कात्यायिनी को चाय बहुत पसंद है। इस पर मुख्यमंत्री ने मजाकिया लहजे में जब यह कहा कि दूधवाली या बिना दूधवाली, तो कात्यायिनी ने मुस्कराते हुए कहा, दूधवाली, वह भी चीनी के साथ। उनके यह बोलते ही वातावरण बिल्कुल मीठा हो गया था।

स्कूल का कभी मुंह न देखने वाली कात्यायिनी ने अपने परिवार का भरण-पोषण मंदिरों और आसपास के घरों में सफाई का काम करके किया। चेप्पड़ में अपनी बेटी, पोते-पोती के साथ रह रहीं कात्यायिनी के पास उनकी सफलता को लेकर जब फोन आया, तो उन्होंने खुशी जाहिर की कि वह अब साक्षर हो गयी हैं। इसी के साथ उन्होंने भारी मन से कहा, ‘मुझे दुख है कि मैं दो अंक और नहीं ला सकी। अगर स्वस्थ रही, तो आगे भी पढ़ूंगी। 1०वीं पास करने की ख्वाहिश है।’

इस नतीजे के बाद वह अगले साल चौथी क्लास की परीक्षा देने की हकदार हो गयी हैं। उनकी याददाश्त अच्छी है, लेकिन कभी-कभार किसी बात को भूल भी जाती हैं। काम करते वक्त प्राय: उनके हाथ कांप जाते हैं, लेकिन इस वजह से कभी विचलित नहीं होतीं। वह इस उम्र भी काफी स्वस्थ हैं। वैसे भी इस उम्र में इस प्रकार की दिक्कत बुजुर्गों के सामने नेचुरली तौर पर आ ही जाती है।

मां के इस ‘करिश्मे’ से बेहुद खुश बेटी सजिता का कहना था कि उनकी मां ने लिटरेसी परीक्षा की तैयारी बड़ी मेहनत करके की। क्यों? पर उनका जवाब था कि उनकी मां ने इससे पहले अपने जीवन में न तो कभी पेन पकड़ी थी और न ही कुछ लिखने का ही प्रयास किया था। उनके हाथ कांपते रहते हैं। बावजूद इसके उन्होंने बहुत ही कठिन परिश्रम किया और बहुत अच्छी नम्बर ले आयीं।

सती कृष्णनन, जिन्होंने कात्यायिनी की प्रेरक (शिक्षक) की भूमिका निभायी, ने जब यह खबर सुनी कि उनकी बुजुर्ग शिष्य ने बहुत ही अच्छे नम्बरों से परीक्षा पास की है, तो उनकी भी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उनका कहना था उनकी शिष्य बहुत ही स्मार्ट है। उसने बड़ी तेजी से अक्षरों को पढ़ना-लिखना सीखा। कविताएं याद करने में, तो वह बहुत ही अच्छी है। उसकी जो सबसे अच्छी बात है, जिससे वह प्रभावित हुईं, वह यह कि कात्यायिनी कभी भी अपनी उम्र को लेकर नहीं सोचती। यही वजह है कि कात्यायिनी के दिमाग को इस बात ने कभी नहीं झिंझोड़ा कि वह 96 बरस की बुजुर्ग महिला हैं।

वह कितनी एनर्जेटिक है, इस बारे में मेरी जुबां पर शब्द नहीं हैं। उसे जब मैंने बताया था कि उसे 1०० में 98 अंक मिले हैं, तो बस इतना ही कहा, अय्यो (ओह)। उसने परीक्षा देने के बाद मुझे बताया था कि क्वेश्चन पेपर बहुत ही सरल था। उसने जिस तरह की तैयारी की थी, उस हिसाब से पेपर बनाया ही नहीं गया था।

कात्यायिनी को जब यह बताया गया कि परीक्षा में अव्वल नम्बर लाने की वजह से मुख्यमंत्री उन्हें सम्मानित करेंगे, और इसके लिए उन्हें राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम जाना पड़ेगा, तो वह खुशी से उछल पड़ी थीं। इसी के साथ उन्होंने तिरुवनंतपुरम जाने की तैयारी शुरू कर दी थी, लेकिन उनके सामने यह समस्या थी कि वह वहां कैसे पहुंचेंगी।

इस बात की खबर जब ग्राम पंचायत को हुई, तो उसने उन्हें तिरुवनंतपुरम पहुंचाने का जिम्मा लिया और इस वास्ते एक गाड़ी की न व्यवस्था की, बल्कि कुछ लोग उनके साथ वहां गये भी।

अब अगर देश में साक्षरता दर को देखें, तो 2०11 की जनगणना के मुताबिक पूरे देश में 74.०4 प्रतिशत लोग ही साक्षर हैं। पुरुष जहां 82.14 प्रतिशत साक्षर हैं, तो महिलाएं 65.46 प्रतिशत साक्षर हैं। राज्यवार साक्षरता में केरल के मुकाबले कोई राज्य नहीं है। केरल की कुल साक्षरता 93.91 प्रतिशत है, जिसमें पुरुष 96.०2 प्रतिशत और महिलाएं 91.98 प्रतिशत साक्षर हैं। उत्तर प्रदेश में कुल साक्षरता 69.72 प्रतिशत है, जिसमें पुरुष 79.24 प्रतिशत, तो महिलाएं 59.26 प्रतिशत साक्षर हैं। साक्षरता के निचले पायदान पर बिहार है। इस राज्य की कुल साक्षरता 63.82 प्रतिशत है। पुरुष 73.79 प्रतिशत साक्षर हैं, तो महिलायें 53.33 प्रतिशत साक्षर हैं।

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