मालविका की गजलों से हुई लखनऊ महोत्सव की शुरुआत

लखनऊ: अवध शिल्पग्राम के सांस्कृतिक पंडाल में चल रहे लखनऊ महोत्सव की शुरुआत गुरूवार को प्रख्यात गायिका डा.मालविका हरिओम की गजलों से हुई। उन्होंने ‘‘प्यार हम जिनका, सम्भाले थे जवानी की तरह’ से शुरुआत की। इसके बाद श्रोताओं के उत्साह को देखते हुए उन्होंने सुमधुर आवाज में गजल ‘‘बाखुदा अब तो मुझे कोई तमन्ना ही नहीं’ और ‘‘जुबां दी है किसी को तो निभाना चाहिए साहिब’ सुनाकर माहौल को रूमानी बना दिया। डा.मालविका ने ‘‘शाम-ए-फिराक अब न पूछ आयी और आके टल गयी’ गजल सुनाकर मंच से विदा ली।

इसके बाद पिछले दिनों कार्यक्रम प्रस्तुत करने से पीछ रह गये संजीव पाराशरी ने अपनी शीरी जुबा में गजल होशवालों को खबर क्या, हुजूर आपका भी ऐहतराम, सरकती जाये रूख से नकाब और चराग आफताब गुम को सुनाया। इसी क्रम में आर मीनाक्षी ने ‘‘नन्ही नन्ही बुंदिया रे’, ‘‘अरे रामा झूला कदम्ब के’ और ‘‘हमरे भए नन्द लाल रे’ के जरिए लोकगीतों की सरिता प्रवाहित की।

लोकगायक अखिलेश यादव ने ‘‘सनेहिया लगावल बहुत बात नइखे’ सुनाया। एन्कर व गायिका वन्दना शुक्ला ने अवधी गीत ‘‘कहां गई हैं जगदम्बे मनाये लावौ’ से दुर्गा की भक्ति दिखायी।

महोत्सव में भाव्या श्रीवास्तव, देविका, नन्दनी खरे, शिवांगी भारद्वाज, सुहाना, उन्नति, रिया ओर ममता ने राजस्थानी घूमर नृत्य की मनोरम छटा बिखेरी।

प्रीति-पिंकी को दर्शकों ने किया ‘‘हूट’: लखनऊ महोत्सव के मंच पर लिप्सिंग कर रहीं गायिका प्रीति-पिंकी ने जब गीत ‘‘मौला-मौला लगायी मैने लौ तोसे’ सुनाया तो लोगों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। लेकिन इसके बाद वे दर्शकों से बात करने लगीं, कि इसी बीच ‘‘हंगामा क्यों न करें’ का रिकार्ड बजने लगा, जिस पर दर्शकों को लग गया कि वे ‘‘लिप्सिंग’ कर रही हैं, इसके बाद दर्शकों ने उन्हें हूट करना शुरू कर दिया।

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