योगी जी का राज्य दलितों के खिलाफ अपराध में सबसे ऊपर

दिल्ली ब्यूरो: यूपी की सत्ता सम्हालते हुए सीएम योगी जी ने कहा था कि अब यूपी अपराध मुक्त हो जाएगा। कुछ इसीतरह की बातें योगी ने चुनाव पूर्व भी कही थी। योगी जी को सुनकर लोग रामराज्य की कल्पना करने लगे थे। लगा था कि यूपी में हर तरफ शांति ही शान्ति होगी। हिंसा की कोइ गुंजाईस नहीं। लेकिन यूपी कितना अपराध मुक्त हो सका इसकी बानगी एमनेस्टी इंडिया की रिपोर्ट में दर्ज है। रिपोर्ट से पता चलता है कि योग जी चले थे यूपी कोअपराध मुक्त करने लेकिन यह अपराध के मामले में सबसे ऊपर जा बैठा। और खासकर दलितों के खिलाफ सबसे ज्यादा अपराध इसीप्रदेश में हुए।

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मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंडिया ने नई रिपोर्ट में बताया है कि 2018 में देश में हाशिये के लोगों, खासतौर पर दलितों के ख़िलाफ़ घृणा अपराध के कथित तौर पर 200 से ज़्यादा मामले सामने आए। इस तरह की घटनाओं में उत्तर प्रदेश लगातार तीसरे साल शीर्ष पर है।वर्ष 2018 में वेबसाइट ने कथित तौर पर घृणा अपराध की 218 घटनाओं का दस्तावेज़ीकरण किया है। इनमें से 142 मामले दलितों, 50 मामले मुसलमानों और आठ-आठ मामले ईसाई, आदिवासी और ट्रांसजेंडरों के ख़िलाफ़ हैं। एमनेस्टी इंडिया के अनुसार घृणा अपराधों के सबसे ज़्यादा 142 मामले दलित समुदाय के ख़िलाफ़ हुए। एमनेस्टी इंडिया ने कहा कि 97 घटनाएं हमले की हैं और 87 मामले हत्या के मामले हैं। 40 मामले ऐसे हैं जिनमें हाशिये पर पड़े समुदाय की महिला या ट्रांसजेंडर व्यक्ति को यौन हिंसा का सामना करना पड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि खासतौर पर दलित महिलाओं ने बड़ी संख्या में यौन हिंसा का सामना किया है। 40 में से 30 मामले उनके ख़िलाफ़ ही हुए हैं।

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रिपोर्ट के मुताबिक, गोरक्षा से जुड़ी हिंसा और ऑनर किलिंग घृणा अपराधों की आम मिसालें हैं। ऐसे अपराधों में उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु और बिहार शीर्ष पांच राज्यों में शामिल हैं। उत्तर प्रदेश (57), गुजरात (22), राजस्थान (18), तमिलनाडु (16) और बिहार (14) मामले कथित तौर पर घृणा अपराध के सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश में सबसे ज़्यादा 57 मामले सामने आए और यह लगातार तीसरा साल है जब यह प्रदेश शीर्ष पर है। साल 2017 में 50 और 2016 में 60 मामले दर्ज किए गए थे।

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एमनेस्टी इंडिया के प्रमुख आकार पटेल ने कहा, ‘घृणा अपराध के संबंध में सबसे पहला कदम न्याय सुनिश्चित करना होगा। यह देखना होगा कि कहां सबसे ज़्यादा लोगों को निशाना बनाया जा रहा है, क्योंकि ये लोग एक समूह विशेष से जुड़े हैं। ’ पटेल ने कहा, ‘दुर्भाग्यवश हम भारत में होने वाले घृणा-आधारित अपराधों की व्यापकता से अनजान हैं क्योंकि कुछ अपवादों को छोड़कर, देश के कानून में घृणा-आधारित अपराधों को एक अलग श्रेणी के अपराधों के रूप में मान्यता नहीं दी गई है। पुलिस को इन अपराधों के पीछे छिपी पक्षपाती मंशा या इरादे को उजागर करने की तरफ कदम उठाने चाहिए और नेताओं को इन अपराधों की निंदा करनी चाहिए।’

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