मध्य प्रदेश में तीन नई पार्टियां दिखाएंगी रंग

विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, बसपा और सपा मिलकर चुनाव लड़तीं, तो सत्तारूढ़ भाजपा की परेशानी बढ़ती। फिलहाल, मध्य प्रदेश में हाल में गठित तीन नये राजनीतिक दलों पर कोई चर्चा नहीं हो रही है। इन तीनों में पहला अगड़ी जातियों के लोगों द्बारा, दूसरा आदिवासी नेताओं द्बारा और तीसरा पूर्व केन्द्रीय मंत्री शरद यादव द्बारा गठित दल है।

कुछ पार्टियों ने आपस में मोर्चेबंदी भी कर ली है। हालांकि इन नई पार्टियों से भाजपा और कांग्रेस को कितना नुकसान होगा, अभी कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन इनके प्रति जन झुकाव को देखते हुए तय है कि ये पार्टियां कांग्रेस और भाजपा के लिए किसी खतरे से कम नहीं हैं।

सामान्य वर्ग पिछड़ा अल्पसंख्यक कल्याण समिति आरक्षण और एससी-एसटी रोकथाम अधिनियम के खिलाफ है। इसने अधिनियम के खिलाफ राज्य में कई रैलियां की हैं। अब, तो यह राजनीतिक दल में भी तब्दील हो गया है। इस संगठन में ज्यादातर नौकरशाह और पेशेवर हैं। सपाक्स समाज पार्टी के रूप में अस्तित्व में आयी इस पार्टी के अध्यक्ष हैं पूर्व आईएएस अधिकारी हीरालाल त्रिवेदी। सेवानिवृत्त महिला आईएएस अधिकारी वीना घनेकर इसकी उपाध्यक्ष हैं। इन दोनों की आवाज प्रदेश की जनता खूब सुन रही है। त्रिवेदी सभी 23० सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं।

अपनी रैलियों में भारी भीड़ से उत्साहित त्रिवेदी का दावा है कि उनकी पार्टी बहुमत प्राप्त करेगी। इस दावे का आधार उनसे पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि समाज यही चाहता है और हम राज्य में यात्रा करते समय लोगों की नाड़ी महसूस कर रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि आम आदमी पार्टी भी नई थी, लेकिन गठन के तुरंत बाद हुए चुनाव में सफल होकर उसने अपनी सरकार बनायी।

आदिवासियों के प्रतिनिधियों द्बारा गठित संगठन को जय युवा आदिवासी संघ के रूप में जाना जाता है। संगठन ने हाल ही में कुक्षी में एक सम्मेलन आयोजित किया था। इसमें प्रसिद्ध अभिनेता व पूर्व कांग्रेस सांसद गोविंदा ने भी भाग लिया था। उन्होंने अपने सम्बोधन में आदिवासियों से अपनी ताकत का एहसास करने को कहा था। सम्मेलन में धार, रतलाम, झाबुआ, अलीरागपुर, बदवानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, बैतूल और देवास के युवा जनजातीय नेताओं ने भाग लिया था। गुजरात और महाराष्ट्र से भी प्रतिनिधि आए थे।

संगठन के अध्यक्ष डॉ. हीरालाल ने घोषणा की थी कि वे 8० जनजातीय वर्चस्व वाली सीटों पर उम्मीदवार खड़े करेंगे। उनका नारा होगा अगला मुख्यमंत्री आदिवासी होना चाहिए। उनका कहना था कि किसी भी राजनीतिक दल ने आदिवासियों के कल्याण की परवाह नहीं की। इसलिए समय आ गया है कि जब हमें अपने हितों का ख्याल रखना चाहिए। जब उनके पास शक्ति होगी तो यह संभव होगा।

शरद यादव द्वारा घोषित मोर्चे में लोकतंत्रिक जनता दल, एसपी, सीपीआई, सीपीएम, बहुजन संघर्ष दल, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, राष्ट्रीय समता दल और प्रजातंत्रिक समाधान पार्टी शामिल हैं। इस मोर्चे के आयोजनों में भी भीड़ जुट रही है। इस मोर्चे के दावे भी कम नहीं हैं। जिस तरह से सपाक्स और आदिवासियों की पार्टी जनता के बीच काम करती दिख रही है, उससे लगने लगा है कि शायद ही किसी पार्टी को बहुमत मिल सके। बहरहाल, दर्जन भर पार्टियां चुनावी मैदान में हैं, लेकिन आदिवासियों की पार्टी बहुत कुछ कहती दिख रही है।

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