इस बार मकर संक्रांति पर कई दुर्लभ ‘संयोग’, करेंगे यह काम तो बनेंगे बिगड़े काम

भारतीय ज्योतिष में 12 राशियों में से एक मकर राशि में सूर्य के प्रवेश को मकर संक्रांति कहते हैं। इसे हिंदुओं का बड़ा दिन भी कहा जाता है। मकर संक्रांति शिशिर ऋतु की समाप्ति और वसंत के आगमन का प्रतीक है। इसे भगवान भास्कर की उपासना एवं स्नान-दान का पवित्रतम पर्व माना गया है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जायेगी।

मकर संक्रांति का पर्व जीवन में संकल्प लेने का दिन भी कहा गया है। संक्रांति यानी सम्यक क्रांति। इस दिन से सूर्य की कांति में परिवर्तन शुरू हो जाता है। वह दक्षिण से उत्तर दिशा की ओर अभिमुख हो जाता है। उत्तरायण से रातें छोटी और दिन बड़े होने लगते हैं। अंधकार घटने लगता है और प्रकाश में बढ़ोतरी शुरू हो जाती है। जब प्रकृति शीत ऋतु के बाद वसंत के आने का इंतजार कर रही होती है, तो हमें भी अज्ञान के तिमिर से ज्ञान के प्रकाश की ओर मुड़ने और कदम तेज करने का मन बनाना चाहिए।

14 जनवरी को सूर्यदेव सुबह 7 बजकर 38 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं। संयोग की बात है कि संक्रांति रविवार के दिन पड़ रही है। रविवार के दिन मकर संक्रांति का होना एक दुर्लभ संयोग है। 70 वर्ष बाद संक्रांति पर एक बड़ा महासंयोग बन रहा है। इस दिन सर्वार्थसिद्धि एवं रवि प्रदोष का योग भी बन रहा है। इस बार की मकर संक्रांति परिजात योग में है। साथ ही त्रयोदशी जैसा महासंयोग भी बन रहा है। जिस कारण इस दिन पूजन व दान का कई गुना लाभ प्राप्त होगा। मकर संक्रांति के दिन किया गया दान कई गुना फलदायी होता है। इस दिन उड़द दाल में खिचड़ी बना कर दान करें। सरसो के तेल में पूड़ियां तल के कुत्ते को खिलाने से लाभ मिलता है। गायत्री मंत्र का जाप अवश्य करें।

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