कांग्रेस के कई दुश्मन बन सकते हैं मित्र, जानिये कैसे बदल रहे समीकरण

अखिलेश अखिल 

बीजेपी के तेज प्रवाह को रोकना आसान नहीं है, अकेले दम पर तो और भी नहीं। तमाम एक दूसरे के दुश्मन दल मिलकर ही बीजेपी से पार पा सकते हैं। यह खेल ठीक उसी तरह का है जब कभी कांग्रेस के प्रवाह को रोकने के लिए तमाम दल एक हो जाते थे। इसी समीकरण को आधार मानते हुए कांग्रेस के भीतर मंथन जारी है। मंथन उन तमाम क्षत्रपों के बीच भी जारी है जिन का अपने  अपने इलाका में सरकार है या फिर मुख्य विपक्ष की भूमिका में रहते हुए भविष्य को लेकर चिंतित हैं। सबकी चाहत यही हो रही है कि कांग्रेस की अगुवाई में मोर्चा बने और बीजेपी के तेज प्रवाह को रोक दे।

भीतर ही भीतर चल रहे इस चिंतन को एक सूत्र में बाँधने की कोशिश भी शुरू हो गयी है। आगामी 13 को सोनिया गांधी ने विपक्ष के सारे नेताओं को रात्रि भोज पर बुलाया है ताकि भविष्य की राजनीति पर चर्चा की जाय और अगले लोक सभा चुनाव की तस्वीर बदली जाय। याद रहे जिन पार्टियों के साथ कांग्रेस दोस्ती बढ़ाना चाह रही है वे सभी भूत में कांग्रेस की कट्टर विरोधी रही हैं और कांग्रेस के खिलाफ कई दफा लड़ाई भी लड़ चुकी है। लेकिन जब सब के ऊपर आफत आयी हो तो दुश्मनी भूलकर दोस्ती कर लेने में ही भलाई है क्योंकि राजनीति में कोई ना स्थाई दोस्त होता है ना ही दुश्मन।

अगर सब कुछ मौजूदा राजनीति के हिसाब से चलता रहा तो संभव है कि कांग्रेस को तीन अलग अलग राज्यों में तीन ऐसी सहयोगी पार्टियां मिल जाएं, जो पहले भाजपा के साथ रही हैं या अब भी भाजपा के साथ हैं। आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ तेलुगू देशम पार्टी, ओड़िशा में सरकार चला रही बीजू जनता दल और महाराष्ट्र में भाजपा की सहयोगी शिवसेना के साथ कांग्रेस की साझीदारी बन सकती है।दो दिन पहले लोकसभा में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी खुद चल कर बीजद के भर्तृहरि महताब ती सीट तक गईं और उनसे काफी देर तक बात करती रहीं। बाद में महताब ने कहा कि लोकसभा की कार्यवाही में तालमेल के बारे में उनकी बात हुई है। पर असल में जानकार सूत्रों का कहना है कि दोनों पार्टियां करीब आ रही हैं। असल में कांग्रेस ओड़िशा में अपने लिए कोई संभावना नहीं देख रही है इसलिए भाजपा को रोकने के लिए वह बीजद से हाथ मिलाने की संभावना देख रही है। तभी कहा जा रहा है कि सोनिया गांधी के 13 मार्च के रात्रिभोज में बीजद का कोई नेता शामिल हो सकता है।
राजनितिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि टीडीपी का भी कोई नेता सोनिया के रात्रिभोज में शामिल हो सकता है। यह बात और है कि टीडीपी की तरफ से सोनिया के रात्रि भोज में नहीं आने की बातें भी सामने आयी है लेकिन ये बाते तब की थी जब टीडीपी बीजेपी के साथ थी। लेकिन अब जब टीडीपी और बीजेपी का अलगाव हो गया है तब माना जा रहा है कि टीडीपी कांग्रेस के साथ जाने को सोचेगी। दुसरा चारा भी तो नहीं है।  आंध्र प्रदेश में चर्चा है कि भाजपा और जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस के बीच साझेदारी हो रही है। तभी टीडीपी पल्ला झाड़ने की तैयारी में है। ऐसे में कांग्रेस को उसके साथ जुड़ने में कोई दिक्कत नहीं होगी। राहुल गांधी ने भी कह दिया कि यूपीए की सरकार आई तो आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा मिलेगा।
तीसरी पार्टी शिवसेना है, जिसने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस दोनों शिवसेना के संपर्क में हैं। सो, कहा जा सकता है कि एक नया और बिल्कुल हैरान करने वाला गठबंधन बन रहा है, जिसमें कई उलटबांसी देखने को मिलेगी। इसके साथ ही बता दें कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ में  भी कुछ स्थानीय दलों के साथ कांग्रेस का गठबंधन हो सकता है।
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