मोदी फार्मूले से राजस्‍थान का सीएम बन सकते हैं सुनील बंसल ?

अश्वनी श्रीवास्तव

लखनऊ : भाजपा में दिग्‍गज नेताओं को पटखनी देकर सत्‍ता और संगठन पर हुकूमत करने वाली टीम गुजरात की निगाह अब राजस्‍थान एवं मध्‍य प्रदेश पर टिक गई है। देश के 18 राज्‍यों में भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकार है, जिनमें से ज्‍यादातर टीम गुजरात के रहमोकरम पर सीएम या डिप्‍टी सीएम बने हैं। उत्‍तर प्रदेश समेत कई राज्‍यों को नेताविहीन कर अपनी मोनोपोली चला रही टीम गुजरात की नजर अब राजस्‍थान और मध्‍य प्रदेश पर टिक गई है, जहां टीम गुजरात की नहीं चल पा रही है।

राजस्‍थान में वसुंधरा राजे और मध्‍य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान अपने बूते चुनाव जीतते चले आ रहे हैं, इसलिए टीम गुजरात का दबदबा इन दोनों राज्‍यों पर नहीं बन पा रहा है। अब इन दोनों राज्‍यों में नरेंद्र मोदी और अमित शाह अपने दिग्‍गज मुख्‍यमंत्रियों को हटाकर अपने कृपापात्र मोहरें फिट करना चाहते हैं। इस योजना के तहत इन दोनों राज्‍यों के संघ से आए महामंत्री संगठन को हटाकर अपने लोगों को महामंत्री संगठन बना दिया गया है। बताया जाता है कि पिछले साल सितंबर महीने में बनी इस योजना के तहत शाह ने अक्टूबर महीने में इसे अमलीजामा भी पहनाना शुरू कर दिया है।

मध्‍य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के खासमखास अरविंद मेनन को हटाकर सुहास भगत को लाया गया है। ऐसे ही राजस्‍थान के संगठन मंत्री प्रकाशजी को हटाकर यूपी से सुनील बंसल के चहते चंद्रशेखर शुक्‍ला को यह जिम्‍मेदारी दी गई है। सियासी जानकार बताते हैं कि महत्‍वाकांक्षी सुनील बंसल राजस्‍थान से हैं, इसलिए वह मोदी मेथड से खुद राजस्‍थान सीएम की कुर्सी हासिल करना चाहते हैं।

जैसे गुजरात में शंकर सिंह बाघेला और केशुभाई पटेल लड़ाई में लाल कृष्‍ण आडवाणी की कृपा पाकर नरेंद्र मोदी गुजरात के सीएम बन गए, ठीक वैसे ही सुनील बंसल भी राजस्‍थान में मुख्‍यमंत्री वसुंधरा राजे एवं ओम माथुर के बीच चल रहे राजनैतिक घमासान के बीच अमित शाह का वरदहस्‍त पाकर फिट होना चाहते हैं। इसी रणनीति के तहत अपने खासे चहेते चंद्रशेखर को राजस्‍थान में फिट कराकर बंसल ने पहली बाजी मार ली है।

राजस्‍थान, दिल्‍ली और यूपी की राजनीति को पिछले ढाई दशकों से देखने वाले एक दिग्‍गज की माने तो सुनील बंसल विद्यार्थी परिषद में काम करते हुए ओम माथुर से दूरी बनाए रखते थे। दूसरी तरफ सुलझे हुए व्‍यवहार कुशल ओम माथुर कभी दिखावे में भरोसा नहीं रखते थे, जबकि सुनील बंसल शुरू से ही युवा स्‍टाइल, भौकाल बनाने में विश्‍वास रखते थे। वसुंधरा के खिलाफ जाने में बंसल तब भी डरते थे आज भी वैसा ही हाल है।

ओम माथुर के केंद्रीय टीम में आ जाने के बाद वसुंधरा का एकक्षत्र राज हो गया। यूपी में ताकत और समृद्धि दोनों पाने के बाद अब सुनील बंसल की निगाह राजस्‍थान के सीएम की कुर्सी पर गड़ गई है। अमित शाह से बंसल की नजदीकी इसे आसान बना सकती है। टीम गुजरात ने वरिष्‍ठ नेताओं को किनारे लगाने के लिए उम्र का फार्मूला लागू किया, जिससे लाल कृष्‍ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिन्‍हा, जसवंत सिंह, लालजी टंडन जैसे नेताओं को साइडलाइन करके अपने विश्‍वसनीय और जय-जयकार करने वालों की टीम खड़ी कर ली।

केवल राजस्‍थान और मध्‍य प्रदेश में टीम गुजरात का फार्मूला लागू नहीं हो पाया। अब यह टीम दोनों राज्‍यों में आज्ञाकारी सीएम चेहरा चाहती है। मध्‍य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान अगर फिर सीएम बन गए तो नरेंद्र मोदी के लिए चुनौती बन सकते हैं। टीम गुजरात ने यूपी में नेतृत्‍व खत्‍म करने के लिए जिस तरीके से दूसरी पार्टियों से आए लोगों को सत्‍ता और संगठन में महत्‍वपूर्ण जिम्‍मेदारी देकर विनय कटियार, ओम प्रकाश सिंह, रमापति राम त्रिपाठी, बालेश्‍वर त्‍यागी, इंद्रजीत मिश्रा जैसे दिग्‍गजों को किनारे लगा दिया, अब यही फार्मूला राजस्‍थान और मध्‍य प्रदेश में भी आजमाए जाने की तैयारी की जा रही है।

इसकी शुरुआत राजस्‍थान से होने वाली है। चंद्रशेखर शुक्‍ला के जरिए सुनील बंसल राजस्‍थान में वसुंधरा के खिलाफ माहौल बनाने के साथ अपने लोगों को फिट कराने की कोशिश करेंगे। अपने लोगों को टिकट भी दिलवाएंगे। आनंदपाल की हत्‍या के बाद वैसे ही राजस्‍थान में वसुंधरा के खिलाफ माहौल है, इसी माहौल के सहारे सुनील बंसल नरेंद्र मोदी और अमित शाह के आज्ञाकारी सीएम बनने के सपने देख रहे हैं।

 

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
Loading...
E-Paper