45 हजार से ज्‍यादा नए केस आए, दुनिया में सबसे तेज स्पीड से भारत में फैल रहा है कोरोना

नई दिल्ली: भारत में अब कोरोना महामारी का संक्रमण दुनिया में सबसे तेजी के साथ बढ़ रहा है। ब्लूमबर्ग कोरोना वायरस ट्रैकर के मुताबिक पिछले सप्ताह के मुकाबले इसमें 20 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है। कोरोना के कुल केसों के मामले में भारत दुनिया भर में अमेरिका और ब्राजील से ही पीछे है। भारत और ब्राजील में सबसे कम टेस्ट किए गए हैं। भारत में प्रति हजार लोगों पर 11.8 और ब्राजील में 11.93 टेस्ट किए जा रहे हैं। दूसरी तरफ अमेरिका में प्रति हजार लोगों पर 152.98 और रूस में 184.34 टेस्ट हो रहे हैं।

रिकवरी रेट 64.23%, डेथ रेट 2.25 प्रतिशत
देश में मंगलवार को लगातार छठे दिन कोरोना के 45 हजार से ज्यादा नए केस आए। 24 घंटों के दौरान आए मामलों की संख्या 47,704 थी। इस दौरान 654 की जान पर कोरोना भारी पड़ा तो 35,176 लोगों ने इसे मात देने में कामयाबी हासिल की। पिछले पांच दिनों से कोरोना को मात देने वालों की संख्या 30 हजार से ज्यादा रही है और रिकवरी रेट 64.23 फीसदी पर पहुंच गया है। सरकार का कहना है कि डेथ रेट भी अब 2.25 प्रतिशत हो गया है। देश के जिन राज्यों में सबसे ज्यादा कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं, उनमें महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक शामिल हैं।

सरकार ने माना, 10 करोड़ नौकरियों पर खतरा
एक सरकारी रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड संकट में देश के अंदर 10 करोड़ नौकरियों पर खतरा पैदा हो गया है। रिपोर्ट में कोविड महामारी के बाद उपजे आर्थिक संकट से निबटने के लिए कृषि से ज्यादा उद्योग पर फोकस करने की बात भी कही गई है। यह रिपोर्ट राज्यसभा की स्टैडिंग कमिटी के सामने रखी गई। सरकार की ओर से नौकरियों पर ऐतिहासिक संकट की बात पहली बार किसी सरकारी रिपोर्ट में सामने आई है।

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने उन कंपनियों को आगाह किया है जो उनके फूड आइटम्स के सेवन से कोरोना संक्रमण के ठीक होने या उससे बचाने का दावा करती हैं। सूत्रों के मुताबिक, अथॉरिटी ने इस बाबत राज्यों को लिखे एक पत्र में कहा है कि इस तरह के दावों पर कड़ी नजर रखी जाए और भ्रामक दावे करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। गौरतलब है कि देश में कोरोना वायरस का प्रसार होने के बाद से ऐसे खाद्य उत्पादों और पेयों की बाढ़ सी आ गई है जो कोरोना से बचाने का दावा करते हैं। हाल में ही एक पापड़ के सेवन से कोरोना को रोकने का दावा सामने आने पर काफी विवाद हुआ था। इस पापड़ का प्रचार एक केंद्रीय मंत्री करते पाए गए थे।

Moderna mRNA1273 से पहले कोई वैक्सीन बाजार में नहीं लाई है। इस बार उसे अमेरिका की सरकार से करीब एक अरब डॉलर का सपॉर्ट मिला है। NIH (नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ) के डायरेक्टर फ्रांसिस कॉलिन्स का कहना है कि जब, और अगर, मॉडर्ना की वैक्सीन असरदार और सुरक्षित पाई जाती है तब उसके पास लाखों डोज तैयार होंगी। वहीं, ऐंथनी फाउची का कहना है कि मॉडर्ना के ट्रायल के नतीजे नवंबर तक आ सकते हैं लेकिन वह पहले के डेटा को देखकर काफी आश्वस्त हैं। इसके पहले चरण के ट्रायल में वैक्सीन दिए जाने पर वॉलंटिअर्स में ऐंटीबॉडी पाई गई थीं और मामूली साइड-इफेक्ट्स ही देखे गए थे।

Pfizer ने अमेरिका को 5 करोड़ लोगों के लिए वैक्सीन बनाने को सरकार से 2 अरब डॉलर का समझौता किया है। कंपनी का कहना है कि अगर ट्रायल सफल होता है तो अक्टूबर तक अप्रूवल लेकर 5 करोड़ लोगों को वैक्सीन की दो डोज साल के अंत तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी। कंपनी कोरोना की वैक्सीन BNT162b1 जर्मन बायोटेक कंपनी BioNTech के साथ मिलकर विकसित कर रही है। इसके अमेरिका और जर्मनी में हुए पहले चरण के ट्रायल में ऐंटीबॉडी के साथ-साथ T-cells भी पाए गए थे। Moderna की तरह यह वैक्सीन भी mRNA पर आधारित है।

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