मध्य प्रदेश के स्कूलों में 92 फीसदी बच्चे भेदभाव की वजह से पानी नहीं पी सकते

अखिलेश अखिल


लखनऊ ट्रिब्यून (भोपाल ब्यूरो): मध्य प्रदेश सूबे का मामा कहलाने में गर्व महसूस करने वाले शिवराज सिंह चौहान की सरकारी नीति चाहे जो भी लेकिन उनकी सामाजिक नीति आज भी दलित विरोधी ही है। उनके सूबे में दलित बच्चो के साथ सबसे ज्यादा भेदभाव करने का मामला सामने आया है। बीजेपी सबका साथ सबका विकास का नारा तो खूब लगाती है लेकिन इस नारे की असलियत कही दिखती नहीं। एक रिसर्च से खुलासा हुआ है कि आज भी मध्य प्रदेश के स्कूलों में 92 फीसद बच्चें भेदभाव का शिकार होते हुए पानी नहीं पी सकते है।

दरअसल चाइल्ड राइट ओब्सरवेट्री एव मध्य प्रदेश दलित अभियान संघ के हालिया सर्वे के अनुसार इस बात का खुलासा हुआ है कि 92 फीसद दलित बच्चें आज भी स्कूलों में पानी पीने से वंचित है। ऐसा सिर्फ इसलिए क्योकिं उन्हें हैंडपंप और टंकी छुने पर पाबंदी है। सर्वे में 57 फीसद बच्चों ने माना कि उन्हें पानी तभी नसीब होता है जब गैरदलित बच्चें उन्हें ऊपर से पानी पिलाते है,वहीँ 28 फीसद बच्चों के माता पिता का कहना है की वो घर आकर ही पानी पीते है जबकि 15 फीसद बच्चों को स्कूल में प्यासा रहना पड़ता है।

सर्वे के अनुसार सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात क्लास में बैठने की व्यवस्था है। जहां 93% दलितों बच्चों की आगे की लाइन में बठने की अनुमति नहीं है। सर्वे के अनुसार 79 फीसद बच्चे पीछे ही बैठकर पढ़ाई करते है। जबकि 14% बच्चें बीच की लाइन बैठते है।

सर्वे में शिक्षकों का दलित बच्चों के कैसा रवैया रखा जाता है, इसका भी पता लगाया गया । आंकड़े चौकाने वाले थे, सर्वे के अनुसार 88 फीसद दलित बच्चों का कहना है शिक्षक उनके साथ भेदभाव करते है। वही सर्वे में 23 % बच्चों का ये भी कहना है कि शिक्षक उनसे ज्यादा सख्ती से पेश आते है। बता दें कि ये सर्वे मध्यप्रदेश कई जगहों पर किये गए है। इनमें बुंदलेखंड,चंबल,महाकौशल,निमाड़ के 10 जिलों के 30 गाँवों के 412 दलित परिवारों से सर्वे किया गया है।अब इस सर्वे के बाद शिवराज सिंह क्या बयान देंगे देखना होगा।

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