ये तो नाइंसाफी है मोदी जी! आपके बजट के बराबर तो 101 लोगों की संपत्ति है

अखिलेश अखिल


नई दिल्ली: दावोस की बैठक के बाद अब देश सुधेरागा या नहीं इस पर चर्चा होनी चाहिए। पीएम मोदी वर्ल्ड इकनोमिक फोरम में चाहे जितनी बातें रखें ,भारत का आर्थिक खेल दुनिया को स्तब्ध कर देने वाला है। जिस तरह से दावोस बैठक से पहले ऑक्सफेम की रिपोर्ट सामने आयी है उससे साफ़ हो गया है कि भारत में असमानता की खाई इतनी चौड़ी हो गयी है जिसे कभी पाटा नहीं जा सकता। हालांकि गरीबी अमीरी के बीच की यह खाई कोई दो चार सालों में नहीं हुयी। पिछले कई साल से चल रहे आर्थिक निति का लाभ देश के कुछ चालाक लोग लेते रहे हैं। घुस , फरेब और भ्रष्टाचार के साथ साथ मिलावट के जरिये सरकारी तंत्र और राजनीति की मिलीभगत से देश में असमानता की जो खाई चौरी की गयी है ,पूरी दुनिया में ऐसी मिशाल देखने को नहीं मिल रही।

ऑक्सफेम की रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत के सिर्फ एक फीसदी अमीरों के पास पिछले साल सृजित कुल संपदा का 73 फीसदी हिस्सा है। यानी 99 फीसदी आवादी के पास सिर्फ 27 फीसदी सम्पदा ही रह गयी है। जाहिर है देश के 99 फीसदी लोगों के बीच तमाम तरह की समस्याएं है। आपको बता दें पिछले साल के ऑक्सफेम सर्वे से यह खुलासा हुआ था कि देश के महज 1 फीसदी अमीरों के पास कुल संपदा का 58 फीसदी हिस्सा है। जबकि इस साल यह हिस्सा 73 फीसदी हो गयी है। कहने में कोई गुरेज नहीं कि यह सारा खेल पीएम मोदी के काल का है। अब मोदी जी को ही समझना पडेगा कि उनकी आर्थिक और सामजिक नीति देश को कहाँ ले जा रही है और देश की आम जनता कहाँ खड़ी है।

इसे भी पढ़िए: अराजकता की भेंट चढ़ा उत्तर प्रदेश, कानून व्यवस्था का बुरा हाल: सपा

सर्वे के अनुसार साल 2017 के दौरान भारत के एक फीसदी अमीरों की संपदा में 20.9 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। यह राशि साल 2017-18 के केंद्र सरकार के कुल बजट के बराबर है। सर्वे के अनुसार सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वैश्व‍िक स्तर पर भी असमानता काफी ज्यादा है। पिछले साल सृजित कुल संपदा का 82 फीसदी हिस्सा दुनिया के सिर्फ एक फीसदी अमीरों के पास सीमित है। दुनिया के दिग्गज अमीरों के जमावड़े वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से कुछ घंटों पहले ही इंटरनेशनल राइट्स ग्रुप ऑक्सफेम के सर्वे नतीजे आने के बाद भारत की हालत पर चर्चा गर्म हो गयी है।

रिपोर्ट बता रही है कि दुनिया के बेहद गरीब 3.7 अरब लोगों की संपदा में कोई बढ़त नहीं हुई है। आपको बता दें कि ऑक्सफेम द्वारा हर साल जारी होने वाली रिपोर्ट पर वर्ल्ड इकोनॉमिक समिट में भी चर्चा की जाती है। ‘रीवार्ड वर्क, नॉट वेल्थ’ शीर्षक की इस रिपोर्ट से यह समझ में आता है किस प्रकार संपदा कुछ लोगों के हाथ में सिमट रही है और करोड़ों लोग गरीबी से बाहर आने के लिए जूझ रहे हैं। अध्ययन के अनुसार एक अनुमान लगाया गया है कि ग्रामीण भारत में एक न्यूनतम मजदूरी हासिल करने वाले श्रमिक को किसी दिग्गज गारमेंट फर्म के शीर्ष वेतन वाले एग्जिक्यूटिव के बराबर आय तक पहुंचने में 941 साल लग जाएंगे।

यह भी देखें: दोस्तों ने पहले पी पिलाई शराब और उसके बाद किया वह काम जिसे सुनकर आप भी रह जाएंगे हैरान

रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल देश में 17 नए अरबपति बने हैं। इस तरह देश में कुल अरबपतियों की संख्या 101 हो गई है। भारतीय अरबपतियों की संपदा बढ़कर 20.7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई है, जो कि सभी राज्यों कि स्वास्थ्य और शिक्षा बजट के 85 फीसदी के बराबर है। ऑक्सफेम ने कहा कि यह चेतावनीजनक स्थ‍िति है कि भारत की आर्थिक तरक्की का लाभ कुछ लोगों के हाथों में केंद्रित हो गया है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper