लखनऊ में दिखी संवेदनहीनता, एम्बुलेंस में ही मर गया कोरोना मरीज, शव के लिए भटकता रहा भाई

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मल्हौर का 27 साल का अंकित गुरुवार को प्रशासनिक अव्यवस्था से लड़ते-लड़ते जिंदगी की जंग हार गया। कोरोना पॉजिटिव निकलने के बाद सीएमओ ऑफिस की टीम गुरुवार को उसे केजीएमयू भर्ती करवाने ले गई थी, लेकिन वह दो घंटे ऐम्बुलेंस में ही तड़पता रहा। डॉक्टर जब तक उसे देखने पहुंचे, तब तक वह दम तोड़ चुका था।

हालांकि, संवेदनहीनता यहीं खत्म नहीं हुई और अगले छह घंटे तक शव इसलिए ऐम्बुलेंस में पड़ा रहा, क्योंकि उसके छोटे भाई तरुण को मृत्यु प्रमाणपत्र देने वाला कोई नहीं था। तरुण ने बताया कि सीएमओ की टीम अंकित को बुधवार रात 10 बजे घर इंटीग्रल हॉस्पिटल ले गई थी, जहां उसे ऐडमिट नहीं किया। रात 12 बजे एरा हॉस्पिटल ले जाने पर वहां भी भर्ती नहीं किया गया। इसके बाद आलमबाग के टीएसएम हॉस्पिटल में सुबह चार अंकित भर्ती हो सका।

गुरुवार दोपहर एक बजे फोन आया कि मरीज की हालत खराब है, उसे केजीएमयू ले जाइए। तरुण के मुताबिक, वह सीएमओ ऑफिस की टीम के साथ दो बजे अंकित को केजीएमयू लेकर पहुंचे और शाम चार बजे जब डॉक्टर देखने आए, तब तक अंकित की सांसें थम चुकी थीं। ऐंबुलेंस में मौजूद टीम का फोन भी सीएमओ ऑफिस में नहीं उठाया गया। तरुण ने बताया कि अंकित की तीन साल पहले ही शादी हुई थी। उसकी दो साल की बच्ची है।

सीएमओ ने कहा, शव मॉर्च्यूरी ले जाओ
केजीएमयू के अधिकारियों से संपर्क कर तरुण को ब्रॉड डेट स्लिप दिलवाई और सीएमओ कार्यालय से संपर्क करवाया। रात 10:45 बजे सीएमओ ने तरुण को फोन कर शव को टीएसएम अस्पताल की मॉर्च्यूरी ले जाने को कहा।

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