राजपूतों की वीर गाथा दिखाती है पद्मावत, जानिए फिल्म के बारे में

फिल्म समीक्षा

चिंता को तलवार की नोक पर रखे, वह राजपूत। रेत की नाव लेकर जो समंदर से शर्त लगाए, वह राजपूत और जिसका सिर कटे फिर धड़, दुश्मन से लड़ता रहे वह राजपूत। संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत का यह डायलॉग साफ करता है कि फिल्म को लेकर फैलाया जा रहा विवाद गैरजरूरी है। फिल्म में राजपूतों का कहीं भी अपमान नहीं किया गया, बल्कि भंसाली ने उनकी शौर्य गाथा ही की है।

काफी विवादों के बाद आखिरकार डायरेक्टर संजय लीला भंसाली की बहुप्रतीक्षित फिल्म पद्मावत सिनेमाघरों में रिलीज हो ही गई। इस फिल्म की शुरुआत कई डिस्क्लेमर्स के साथ होती है। इन डिस्क्लेमर में बार-बार स्पष्ट किया गया है कि फिल्म की कहानी का इतिहास से कुछ लेना-देना नहीं है। साथ ही यह भी बताया गया है कि इसकी कहानी प्रसिद्ध कवि मलिक मोहम्मद जायसी की काव्य रचना पद्मावती पर आधारित है।

फिल्म की कहानी की बात करें तो पद्मावत को लेकर जितने विवाद अब तक हुए हैं, वो कितने बेमानी थे, यह फिल्म देखने के बाद साफ हो जाता है। फिल्म में राजपूतों की गरिमा और मान-सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला एक भी दृष्य नहीं है। फिल्म के अंत में आप राजपूताना गरिमा, वीरता और आन-बान और शान को सलाम करते हुए बाहर निकलते हैं।

भंसाली हमेशा से ही लार्जर देन लाइफ सिनेमा बनाते रहे हैं, लेकिन पद्मावत उनके जीवन की सबसे बड़ी फिल्म है। भारतीय सिनेमा के इतिहास में इतनी भव्य फिल्म अभी तक शायद ही कोई दूसरी बनी हो। शायद पहली बार ऐसी फिल्म देखने को मिलेगी। इतनी भव्यता में भी संजय लीला भंसाली एक दृश्य की छोटी-छोटी डिटेल पर बारीकी से काम करते नजर आते हैं। उन्होंने राजस्थान के रंग को नए आयाम दिए हैं।

पद्मावत की कहानी
पद्मावती (दीपिका पादुकोण) सिंघल राज्य की राजकुमारी है। उनकी खूबसूरती की चर्चा पूरे देश में होती है। एक दिन अचानक रतन सेन (शाहिद कपूर) की मुलाकात पद्मावती से होती है और वे उनसे प्यार करने लगते हैं। इसके बाद पद्मावती और पहले से शादीशुदा रतन सेन की शादी हो जाती है। कुछ दिनों तक तो सबकुछ ठीक रहता है, लेकिन जब रतन सेन के दरबार से निकाला हुआ पुरोहित राघव चेतन दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी (रणवीर सिंह) से मिलता है तो कहानी नया मोड़ लेती है। राघव अलाउद्दीन को रानी पद्मावती की खूबसूरती के बारे में बताता है। इसके बाद खिलजी पद्मावती को पाने के लिए मेवाड़ पर चढ़ाई कर देता है। खिलजी छल से महारावल रतन सेन को बंदी बना लेता है और बदले में रानी पद्मावती की मांग करता है। खिलजी अपने इरादों में कामयाब हो पाता है या नहीं और महारानी पद्मावती क्यों जौहर का फैसला लेने को मजबूर होती हैं? ऐसे सवालों का जवाब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

डायरेक्शन में भंसाली ने की जबरदस्त मेहनत
फिल्म में डायरेक्टर संजय लीला भंसाली की मेहनत साफ दिखाई देती है। उन्होंने जहां रानी पद्मावती की खूबसूरती को बखूबी दिखाया है तो महारावल रतन सेन के पराक्रम और सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी की क्रूरता को दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पूरी फिल्म में भंसाली का जादू साफ दिखता है। युद्ध से लेकर जौहर तक हर दृश्य को भंसाली ने गजब तरीके से फिल्माया है और संवाद अदायगी भी लाजवाब है। इंटरवल तक पद्मावती और रतन सेन के प्यार की कहानी को दिखाया गया है। लेकिन, इंटरवल के बाद की कहानी को जबरदस्ती खींचा गया है। युद्ध के सीन काफी लंबे हैं और अलाउद्दीन खिलजी को काफी लाउड करके उसकी सनक को काफी फुटेज दी गई है। इससे फिल्म स्लो हो जाती है।

दीपिका हैं लाजवाब
पूरी फिल्म में दीपिका पादुकोण ही छाई रहीं। पद्मावती के रोल में वह एकदम फिट बैठी हैं। उन्हें देखने के बाद लगता है कि कोई और इस रोल को उनसे बेहतर नहीं कर सकता था। रतन सेन के किरदार के साथ शाहिद कपूर ने बखूबी निभाया है। इसके अलावा रणवीर सिंह ने अलाउद्दीन खिलजी के कैरेक्टर को अपनी अदाकारी से जीवंत कर दिया है। पद्मावत का म्यूजिक भी जबरदस्त है। फिल्म का गीत घूमर पहले ही हिट हो चुका है।

मुख्य कलाकार- दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह, शाहिद कपूर आदि।
निर्माता/निर्देशक : संजय लीला भंसाली
संगीत : संजय लीला भंसाली, संचित बल्हरा
स्टार : 4

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