संघ की ही मुठ्ठी में बंद है प्यारे तोगड़िया की राजनीति

अखिलेश अखिल


नई दिल्ली: हिन्दुवाद के कट्टर समर्थक और हिन्दुत्व के नाम पर समाज में जहर घोलने का काम करने वाले विश्व हिन्दू परिषद् के कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया आंसू बहा रहे हैं और जान का ख़तरा बता रहे हैं। यह कुछ अजीब बात भी है और बहुत कुछ कहता भी है। प्रवीण तोगड़िया संघ के आदमी हैं और वीएचपी भी संघ का ही संगठन है फिर तोगड़िया इतने निराश और डरे क्यों है ? तोगड़िया की राजनीति जिस तरह की रही है उसमे देश का कोई भी आम नागरिक यकीं नहीं करता।

फिर यह भी सच है की तोगड़िया जिस कट्टरवाली राजनीती और हिंदूवादी खेल को आगे बढ़ाते रहे हैं ,संघ के इशारे पर ही होता रहा है। जाहिर कि संघ की मर्जी से ही तोगड़िया बहुत कुछ करते रहे हैं और अब यह भी साफ़ है कि संघ के इशारे पर ही तोगड़िया के साथ जो भी घटना घटती नजर आ रही है ,होता दिख रहा है। संभव है कि तोगड़िया के इस रुदाली के पीछे भी कोई ना कोई बड़ा खेल छुपा है या फिर तोगड़िया वाकई सत्ता व्यवस्था से डर गए हैं और उन्हें लगने लगा है कि शायद अब संघ में उनकी जरूरत नहीं रह गयी।

अब राजनीति की बात। यह सब कोई जानता है कि तोगड़िया ने गुजरात चुनाव को प्रभावित किया था और बीजेपी की लंका में आग भी लगाईं थी। प्रवीण तोगड़िया ने अपने तीखे तेवर के कारण गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा को 99 सीटों तक सीमित कर दिया था, जिससे उनसे न सिर्फ भाजपा बल्कि पितृ संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ तक बुरी तरह खफा है। दरअसल, भाजपा इस बार गुजरात विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस के नेतृत्व में कड़ी चुनौती का सामना कर रही थी। राहुल गांधी की चुनावी रणनीति को उनके पक्ष में जातीय नेताओं हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर व जिग्नेश मेवाणी की गोलबंदी के कारण बल मिला था। इन सभी के सार्वजनिक कार्यक्रमों के सुर भाजपा के विरोध में थे। इस पर प्रवीण तोगड़िया भी गुजरात में महीनों से सक्रिय थे।

वे वैसे मुद्दे उठाते रहे, जिससे भाजपा को चुनावी नुकसान हो सकता था। भाजपा जहां इस बार मुसलिमों को गुजरात में लुभाने के लिए प्रयास कर रही थी, वहीं तोगड़िया के तेवर उनके प्रति हमेशा की तरह तल्ख थे। उन पर पाटीदार आंदोलन को उकसाने के प्रयास का आरोप है। यह भी दिलचस्प बात है कि कल प्रेस कान्फ्रेंस के बाद प्रवीण तोगड़िया से मिलने सबसे पहले भाजपा विरोधी पाटीदार नेता हार्दिक पटेल व कांग्रेस नेता अर्जुन मोढवाडिया भी पहुंचे। दोनों ने मुलाकात के बाद मीडिया में भाजपा, नरेंद्र मोदी व अमित शाह के खिलाफ जबकि तोगड़िया के समर्थन में बयान दिया।

तोगड़िया के गुजरात खेल को लेकर संघ परिवार की ओर से चेतावनी दी गयी और कहा गया कि वे ऐसा नहीं करें। लेकिन, तोगड़िया कहां मानने वाले थे। राजनीति प्रेक्षकों का मानना है कि शायद तोगड़िया ऐसा कर भाजपा के विजय रथ को रोक देना चाहते थे, ताकि नरेंद्र मोदी-अमित शाह को नीचा देखना पड़े। दरअसल, नरेंद्र मोदी के गुजरात का सीएम बनने के बाद प्रवीण तोगड़िया से उनके रिश्ते बिगड़ गये और तोगड़िया ने हमेशा एंटी मोदी लाइन ही रखी।

संघ परिवार का एक बड़ा तबका यह चाहता हैं कि प्रवीण तोगड़िया विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष पद से हट जायें। लेकिन, तोगड़िया ने उनकी यह कोशिशें विफल करने में अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी है। 29 दिसंबर को भुवनेश्वर में विहिप की कार्यकारी बोर्ड की बैठक में उन्हें पद से हटाने का प्रयास हुआ था, लेकिन वह सिरे नहीं चढ़ा। यह भी माना जा रहा है कि कल का उनका प्रेस कान्फ्रेंस, आंसू और इनकाउंटर का भय स्वयं को पद पर बनाये रखने की उनकी एक रणनीति का ही हिस्सा है, ताकि कार्यकर्ताओं की सहानुभूति उनके प्रति रहे।

तोगड़िया के अलावा विहिप के अध्यक्ष राघव रेड्डी का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है, जिनकी जगह वी कोकजे को अध्यक्ष का प्रयास किया जा रहा था, जिन्हें पीएम मोदी का भी समर्थन हासिल था, लेकिन तोगड़िया ने इसका कड़ा विरोध किया। उनके ऐसे ही रुख ने संघ परिवार को उनके नाराज कर दिया है। अब देखना होगा कि तोगड़िया आगे की क्या रणनीति अपनाते हैं। आप पूरा गेंद तोगड़िया के पाले में ही है। जो करना है उन्हें ही करना है। बीजेपी सरकार अब उनकी हर हरकत पर नजर रखेगी। मोदी और शाह की जोड़ी तोगड़िया को शायद ही माफ़ करें क्योंकि तोगड़िया पिछले कई साल से उनके खिलाफ बोलते रहे हैं। अगर तोगड़िया की जगह कोई और होता तो उसकी राजनीति कब की समाप्त हो गयी होती। चुकी मोदी ,शाह और तोगड़िया सब संघ के लोग हैं इसलिए संघ का निर्णय ही तोगड़िया को स्थापित करेगी या फिर विस्थापित।

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