राष्ट्रीय मंच के जरिये बीजेपी पर नकेल कसने की तैयारी ,बीजेपी में टूट की संभावना

अखिलेश अखिल


नई दिल्ली: बीजेपी की मोदी -शाह की राजनीती को नाथने की तैयारी शुरू हो गयी है। राष्ट्रीय मंच नाम से तैयार इस फोरम की बागडोर बीजेपी के वरिष्ठ नेता और मोदी -शाह की राजनीति के प्रबल विरोधी यशवंत सिन्हा सम्हाल रहे हैं। मंच का मकसद ऐसे लोगों की राजनितिक आवाज को धारदार बनाने की है जो किसी भी पार्टी में रहते हुए हासिये पर खड़े हैं और पार्टी के भीतर उनकी आवाज सुनी नहीं जा रही है। लेकिन इस फोरम का मुख्य मकसद मोदी सरकार की आर्थिक नीति का विरोध करना है और देश की जनता के सामने देश की हालत और बीजेपी की राजनीती को एक्सपोस करना भर है। ऐसे में जब लोक सभा चुनाव अब काफी नजदीक आ गए हैं ,राष्ट्रिय फोरम का गठन बीजेपी के लिए सिरदर्द के सामान है।

जो खबर सामने आ रही है उसके मुताबिक़, इस फोरम से कांग्रेस नेता मनीष तिवारी, ‘आप’ नेता आशुतोष और आशीष खेतान, जदयू नेता पवन वर्मा, सपा के घनश्याम तिवारी, तृणमूल कांग्रेस के दिनेश त्रिवेदी और एनसीपी के मजीद मेमन आदि जुड़ेंगे। इसके अलावा सामाजिक और किसान संगठनों के बड़े चेहरों को भी जोड़ने की तैयारी है। नीतीश कुमार की पार्टी के पवन वर्मा मोदी सरकार की नीतियों के आलोचक रहे हैं। मंच गठन के पीछे मकसद है कि नेताओं को ऐसा प्लेटफॉर्म दिया जाना, जिससे वे ऐसी बातें भी खुलकर कह सकें, जो पार्टी के प्लेटफॉर्म पर नहीं कह सकते। खास बात है कि राष्ट्रीय मंच से जुड़ने के लिए किसी भी व्यक्ति को अपनी पार्टी की सदस्यता नहीं छोड़नी पड़ेगी।

राजनीति के जिस काल में सिन्हा जिस तरह से मोदी विरोधियों को ऐसा मंच मुहैया कराने जा रहे हैं,वह बीजेपी की नीतियों पर हमला करने के सिवा कुछ नहीं है। बजट सत्र की पूर्व संध्या पर लांच हो रहा यह नेशनल फोरम सरकार के खिलाफ बड़ा मंच बन सकता है।बताया जा रहा है कि इस मंच के ज़रिए राष्ट्रीय महत्व से जुड़े मुद्दों पर चर्चा को बढ़ावा दी जाएगी। ताकि केंद्र सरकार की नीतियों की समीक्षा कर जनता को उसके सही और गलत पहलुओं से रूबरू कराया जाए।

गौरतलब है कि काफी समय से यशवंत सिंहा लगातार भाजपा और केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ खड़े नज़र आ रहे हैं। नोटबंदी से लेकर जीएसटी और एफडीआई तक पर उन्होंने सवाल उठाए हैं। साथ ही पिछले काफी समय से ये ख़बरें राजनीतिक गलियारों में बनी हुई हैं कि भाजपा में आंतरिक आज़ादी ख़त्म होती जा रही है। इसके कारण पार्टी में बहुत से नेता विरोध करते भी दिख रहे हैं। इस मंच के जरिये बीजेपी के अन्य नेता भी जुड़ने को लालायित हैं और वे सब यशवंत सिन्हा के संपर्क में हैं। माना जा रहा है कि दर्जन भर से ज्यादा पूर्व नौकरशाह भी इस मंच के साथ जुड़ेंगे और देश की असली तस्वीर जनता के सामने रखेंगे।

आपको बता दें कि हाल ही में हुए गुजरात चुनाव में भी टिकट बटवारे के समय पार्टी में नेताओं के बीच फूट सबके सामने आ गई थी। देश में भाजपा के खिलाफ दलित विरोधी माहौल भी बन रहा है। हिंदुत्व की राजनीति और आंतरिक आज़ादी न होने के चलते भाजपा के दलित नेता भी दलित समाज की मूल मांगों को आगे बढ़कर नहीं उठा पा रहे हैं। जिग्नेश मेवानी जैसे युवा दलित नेताओं के उभरने का यह एक बड़ा कारण है। ये मंच ऐसे नेताओं के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। भाजपा में बहुत से वरिष्ठ नेताओं को भी मार्गदर्शक मण्डल में बैठाकर उन्हें पीछे धकेल दिया गया है। लाल कृष्ण आडवाणी भी इसी मार्गदर्शक मण्डल का शिकार हुए हैं। आने वाले समय में इससे अगर भाजपा के ये वरिष्ठ नेता और साथ ही दलित नेता इस मंच से जुड़ते हैं तो भाजपा में आंतरिक फूट को बढ़ावा मिल सकता है।

नोटबंदी के बाद लगातार पार्टी के खिलाफ देश में माहौल भी बनता नज़र आ रहा है। भाजपा की पुरानी साथी शिवसेना ने भी 2019 में चुनाव अकेले लड़ने का एलान किया है। केंद्र से लेकर राज्यों तक भाजपा की सरकारों का प्रदर्शन भी अच्छा नहीं है। इस सब के बीच भाजपा के ही एक वरिष्ठ नेता का भाजपा के ही विरोध में मंच मुहैय्या कराना चुनाव में पार्टी को भारी पड़ सकता है। बजट के बाद इस मंच के जरिये मोदी सरकार की समीक्षा शुरू हो जायेगी और राजनीती की एक अलग विचारधारा भी सामने आएगी।

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