यूपी के डीजीपी की कमान सौंपी जा सकती है रजनीकांत मिश्रा को

अश्वनी श्रीवास्तव

लखनऊ : यूपी का स्टेट गेस्ट हाउस कांड ले डूबा डीजीपी ओपी सिंह को. जी हाँ यह बात बहुत कड़वी है, लेकिन सच यही है. दरअसल पंद्रह दिन पहले केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के खासमखास कहे जाने वाले सीआईएसएफ के डीजी ओपी सिंह को सुलखान सिंह का बढ़ाया गया कार्यकाल ख़त्म हो जाने के बाद दिल्ली से सिंह को यहाँ लाकर तैनात किया गया था, लेकिन उन्हें केंद्र से कार्यमुक्त न किये जाने के कारण उनकी तैनाती यहां लटक गयी और अब तो पीएमओ कार्यालय ने उनके प्रस्ताव को ही ख़ारिज कर दिया है. जिसके चलते अब सूबे में नए डीजीपी के नाम पर चर्चा शुरू कर दी गयी है.

जानिए क्यों अटके ओपी सिंह ?

सूत्रों के मुताबिक 2 जून 1995 को लखनऊ में हुए स्टेट गेस्ट हाउस कांड के दौरान यहां के एसएसपी ओआओपी सिंह थे. इसलिए उन्हें अगर यहां का डीजीपी तैनात किया जाता तो बसपा प्रमुख मायावती को बीजेपी के खिलाफ साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव का हथियार मिल जाता. नतीजतन पीएमओ कार्यालय में उन्हें कार्यमुक्त किये जाने का प्रस्ताव ही पीएम मोदी के इशारे पर ख़ारिज कर दिया गया. बताया जाता है कि पीएम नरेंद्र मोदी 2019 में भी केंद्र कि सत्ता को अपने हाथों से जाने नहीं देना चाहते हैं.

जिसके चलते वह किसी भी अफसर की तैनाती से पहले उनके बारे में जांच पड़ताल पूरी होने के बाद ही कोई निर्णय ले रहे हैं. इसी को लेकर ओपी सिंह की यूपी में नियुक्ति को लेकर भेजा गया प्रस्ताव ख़ारिज किया गया है. जानकर सूत्र बताते हैं कि अगर ओपी सिंह को यूपी का डीजीपी बना दिया जाता तो मायावती जगह-जगह सभा कर यही कहती कि बीजेपी ने उन्हें मरवाने के लिए ओपी सिंह की तैनाती की है. इसीलिए उनकी तैनाती का प्रस्ताव ख़ारिज कर नए डीजीपी की तलाश शुरू कर दी गयी है.

दौड़ में भावेश भी शामिल

नए डीजीपी की रेस में जो अफसर शामिल हैं, उनमें सबसे आगे केंद्र में तैनात एसएसबी के डीजी रजनीकांत मिश्रा का नाम सबसे आगे चल रहा है. दूसरे नंबर पर साल 1987 बैच के आईपीएस अफसर भावेश सिंह शामिल हैं.बताया जाता है कि भावेश सिंह सीएम योगी के बहुत ही करीबी और भरोसेमंद अफसरों में से एक हैं. इन दिनों वह आईबी में तैनात हैं. इसके अलावा प्रवीण सिंह, हितेश अवस्थी और गोपाल गुप्ता के भी नामों की चर्चा है. बहरहाल ओपी सिंह की नियुक्ति की पत्रावली गृहमंत्रालय ने एक महीने पहले ही पीएमओ कार्यालय को भेज दी थी, लेकिन आरएसएस की ओर से सिंह को कार्यमुक्त न किये जाने का भारी दबाव लगातार बनाया जा रहा था. इसी को लेकर उनका प्रस्ताव ख़ारिज कर दिया गया.

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
Loading...
E-Paper