रेड्डी तो बहाना हैं, तोगड़िया को हटाना है

नई दिल्ली: राघव रेड्डी तो बहाना हैं, प्रवीण तोगड़िया को विहिप से हटाना है। इसके लिए 52 वर्षीय “विश्व हिन्दू परिषद” में वह सब किया जा रहा है जो इसमें व इसकी जननी “राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ” में कभी नहीं हुआ था। इससे संघ व विहिप के लिए जीवन समर्पित करने वाले कार्यकर्ता बहुत ही आहत हैं। कुछ तो बिना लाग-लपेट सीधे – सीधे सवाल करने लगे हैं कि क्या यही है शुचिता, यही है प्रतिबद्धता, यही है त्याग, यही है हिन्दुत्व, भारतीय संस्कृति की रक्षा का अभियान? क्या गुरू गोलवरकर ने इसी दिन के लिए 1964 में इस संस्था ( विहिप) को बनाया था। आखिर किसके इशारे पर 79 वर्ष के व्यक्ति को विश्व हिन्दू परिषद का अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष बनवाने की कोशिश हो रही है?

किसके इशारे पर 73 वर्ष के चंपत राय ( विहिप के अंतरराष्ट्रीय महासचिव हैं ) इतना तलवार भांज रहे हैं। इस बारे में संघ के एक बुजुर्ग कार्यकर्ता का दुखी मन से कहना है कि जब संघ में 75 वर्ष से उम्र के बाद पदाधिकारी स्वेच्छया पद त्याग देते हैं तो एक ऐसा व्यक्ति जो जज रहा हो, जो अटलबिहारी वाजपेई की सरकार के समय राज्यपाल रहा हो, जो 79 वर्ष का हो गया हो, उसको लाकर विहिप जैसे प्रखर हिन्दुत्ववादी संगठन के सिर पर बैठाने की कोशिश क्यों हो रही है? क्या यह विहिप को दो फाड़ करने के लिए किया जा रहा है? क्या इसके बाद संघ के अन्य आनुषांगिक संगठनों के शीर्ष पद पर भी ऐसे ही यसमैन को बैठाने का ढर्रा नहीं शुरू हो जायेगा, जिनके इशारे व दबाव में यह सब हो रहा है| यदि यह सफल हो गया, तो भविष्य में संघ के अन्य गैर राजनीतिक आनुषांगिक संगठनों में भी यही होने लगेगा।

विहिप के एक प्रतिबद्ध कार्यकर्ता व स्वयंसेवक का कहना है कि विहिप के शीर्ष पद पर जिस तरह से 79 वर्ष के व्यक्ति को बैठाने के लिए यह सब हो रहा है, उससे साफ-साफ संकेत जा रहा है कि संघ का जो भी आनुषांगिक संगठन, उसका सर्वोच्च पदाधिकारी मंदिर या हिन्दुत्व के सरोकारों को लेकर केन्द्र की वर्तमान सरकार, उसके हुक्मरान पर अंगुली उठायेगा, उसका हश्र यही होगा। उस पर 79 वर्ष के ऐसे व्यक्ति को बैठा दिया जायेगा जो उसके संकेत को समझ कर बोले, करे। उसकी हां में हां मिलावे। यदि वह 79 वर्षीय व्यक्ति दलित हो तब तो इसकी आड़ में सत्ता के लिए जाति की राजनीति का खेल भी हो जायेगा। कहा जाने लगेगा कि देखिए, संघ के सबसे प्रभावशाली व प्रखर एक आनुषांगिक संगठन, विहिप के शीर्ष पद पर 79 वर्ष के दलित को बैठा दिया गया। उसको विहिप का सर्वोच्च पदाधिकारी बना दिया गया, तो इस तरह जो संगठन अब तक हिन्दुत्व की रक्षा के लिए, श्री रामलला जन्म भूमि के लिए, उस पर पर मंदिर निर्माण के लिए जूझते रहने, आंदोलन चलाते रहने का काम करता रहा है|

उसके लिए संघ के आनुषांगिक राजनीतिक संगठन भाजपा की सरकारों, उसके हुक्मरानों तक से टकराने से नहीं हिचकता रहा है| उस प्रखर संगठन विहिप को नख-दंत विहीन करके पालतू बना लेने, तोड़-मरोड़ कर अपने पाले में कर लेने का संदेश दे दिया जायेगा। यह संदेश दे दिया जायेगा कि जो भी हुक्मरान से सवाल करेगा, उसके किये वादे को याद दिलाने की जुर्रत करेगा, जो भी उसकी हां में हां नहीं मिलायेगा, उस संगठन व उसके सर्वोच्च पदाधिकारी का हश्र यही होगा। जो भी हो, यदि विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष पद से राघव रेड्डी को चाहे जैसे भी हो हटाकर 79 वर्षीय व्यक्ति को अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया, तो वह व्यक्ति अध्यक्ष बनने के बाद प्रवीण तोगड़िया को विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्य़क्ष पद से हटाकर चंपत राय को कार्यकारी अध्यक्ष बनायेंगे।

इस तरह कहीं पर निगाहें, कहीं पर निशाना की तर्ज पर 79 वर्षीय व्यक्ति को विहिप का अध्य़क्ष बनाकर दलितों को खुश करने के अलावा तोगड़िया को विहिप से पैदल करने का अहं भी तुष्ट कर लिया जायेगा। विहिप के एक पदाधिकारी का कहना है कि यह किस मोटा भाई के इशारे पर हो रहा है, सबको मालूम है। तोगड़िया कई बार संवाददाता सम्मेलन में इसका संकेत दे चुके हैं। देखना यह है कि बरगद का बृक्ष लोगो वाले, धर्मो रक्षति रक्षितः मोटो वाले विश्व हिन्दू परिषद को अपना तन-मन-धन समर्पित कर चुके तोगड़िया की धर्म रक्षा करता है या सत्ता उनको धूल में मिला देती है।

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