यूपी के एटा में स्कूल बस हादसे में निलंबित हुए शिक्षा अधिकारियों की क्या दोबारा होगी जांच ?

एटा: अलीगंज स्कूल बस हादसे में विभागीय कारस्तानी के खुलासे के बाद महकमे में हड़कम्प मच गया है। बहाल हुए शिक्षा अधिकारियों के भी होश उड़ गए हैं। मासूमों के गुनहगार अधिकारियों को शिक्षा अधिकारियों की मिलीभगत से ही बहाल किये जाने की चर्चा सुर्ख़ियों में है। जिसके चलते शिक्षा विभाग के जांच अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है।

गौरतलब है कि बीते साल 19 जनवरी को अलीगंज में स्कूल बस- ट्रक में भीषण भिंडत हुई थी। इस हृदय विदारक घटना में 12 मासूमों सहित 13 लोगों की मौत हुई थी, जबकि एक दर्जन से अधिक मासूम घायल हुए थे। इस घटना पर प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक ने दुःख व्यक्त किया था। इस घटना के वीभत्स दृश्यों ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया था, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों का दिल ‘पत्थर’ बना रहा। विभागीय अधिकारियों ने आनन – फानन में निलंबित किए एनपीआरसी, एबीआरसी व खंड शिक्षा अधिकारी को विभागीय जांच में बहाल कर दिया गया है।

आरटीआई से हुआ खुलासा

इसका खुलासा आरटीआई एक्टविस्ट सुनील कुमार को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मिले अभिलेखों से हुआ। शिक्षा अधिकारियों के निलंबन व बहाली में हुए खेल का खुलासा मीडिया में सुर्खियां बना। खेल का खुलासा होने पर विभाग में हड़कम्प मच गया है। वहीं विभागीय कारस्तानी से बहाल हुए अधिकारियों के भी होश उड़ गए हैं। उन्हें अब फिर से कार्यवाही का खौफ सताने लगा है। आरटीआई के तहत मिले निलम्बन व बहाली दस्तावेज़ों में विभागीय कारस्तानी साफ झलक रही है। शिक्षा विभाग के तत्कालीन शिक्षा अधिकारियों विभागीय दोषियों को बचाने में शुरू से ही जुटे हुए थे,तभी बिना मान्यता के स्कूल संचालित होने पर भी तत्कालीन बीएसए ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं कराया था। विभागीय सूत्रों के अनुसार मासूमों के शवों पर रिश्वतखोरी हो गई थी।

संदेह के घेरे में विभाग की भूमिका

शिक्षा विभाग के अधिकारी जेएस विद्या निकेतन से जुड़ी जानकारी व विभागीय जांच रिपोर्ट छिपाकर अभी भी विभागीय दोषियों को बचाने में जुटे हैं। आरटीआई के तहत विभाग में लंबित एक आवेदन की सूचना बेसिक शिक्षा अधिकारी अभी तक सूचना प्राप्त नहीं करा पाए हैं। जिससे विभागीय अधिकारियों की भूमिका फिर से संदेह के घेरे में आ गई है।

मजिस्ट्रेटी जांच नहीं हुई पूरी

मासूमों की मौत के गुनाहगारों पर कानूनी शिकंजा कसने को बैठाई गई मजिस्ट्रेटी जांच अब तक पूरी नहीं हो पाई है, जबकि घटना को एक साल होने जा रहा है। मजिस्ट्रेटी जांच पूरी होने से पहले ही शिक्षा विभाग ने अपने अधिकारियों को क्लीनचिट दे दी, जबकि मासूम न्याय को तरस रहे है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
Loading...
E-Paper